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Criminal complaint against dead person

(Querist) 08 October 2013 This query is : Resolved 
मेरे ताउजी और पिताजी ने मिल कर एक जमीन संयुक्त नाम से खरीदी थी।
याने की ताउजी +पिताजी के नाम से। ताउजी अविवाहित - निसंतान गुजर गए थे।
मेरे पिताजी भी बिना किसी वसीयत के गुजर चुके हैं। हम दो भाई हैं।
कुछ समय पहले मेरे बड़े भाई का भी देहांत हो गया।
अभी हाल में मेरे स्वर्गीय भाई के लडको ने उस जमीं के टुकड़े कर बेचना शुरू कर
दिया तो पूछने पर उन्होंने बताया की वह जमीं तो उनके पिताजी याने मेरे भाई की
अकेके की है और उसी ने खरीदी थी। जमीं के कागज भाई के पास ही रहे थे।
जब हमने नगर निगम में जानकारी ली तो वह से मूल खरीद पात्र की कॉपी मिली
जिसमे मेरे बड़े भाई ने हमारे पिता का नाम काट कर खुद का नाम लिख लिया था
व् निगम में ताउजी +खुद के नाम से दर्ज करवा ली थी। फिर ताउजी की मृत्यु बाद
एक सपथ पात्र देकर खुद को ताउजी का एकमात्र पुत्र दिखा कर उसकी नाम्दार्ज़ी सिर्फ
अपने अकेले के नाम करवा कर निगम से प्रमाण पात्र भी ले लिया। जमीं का कुछ
हिस्सा भाई ने अपने एक पुत्र को गिफ्ट कर दिया। अब उसके लड़के उस जमीं को
अपने पिता से मिली हुई बता कर बेच रहे है। जबकि किये हुए गलत कामो की
उन्हें जानकारी है फिर भी पूरी जमीन हडप कर बैठे है।

स्थानीय वकील साब का कहना है की इसमें मेरे दिवंगत भाई व् उसके
वारिस ,याने उसके लड़के , लड़की, पत्नी ,निगम अधिकारी ,व् नए क्रेता पर
धोखा-दडी का फोजदारी केस बनता है(क्योंकि वह सब उस जमीन को अपने
नाम करवाने की कार्यवाही कर रहे हैं व् बेच भी रहे हैं।) ,
लेकिन मैं इस बात से सहमत नहीं हो
पा रहा हूँ की एक मृतक व्यक्ति पर कैसे मुकदमा दायर किया जा सकता है?

कृपया (हिंदी/इंग्लिश) में बताएं की मेरे पास इस स्तिथि से निपटने के
क्या उपाय है व् मुकदमा किस किस पर बनेगा ?
Nadeem Qureshi (Expert) 08 October 2013
Dear Querist
the criminal case can not be filed against dead person.
ajay sethi (Expert) 08 October 2013
agree with nadeem
R.K Nanda (Expert) 08 October 2013
criminal case can not be filed against dead person.
V R SHROFF (Expert) 08 October 2013
Accused is dead, means no accused at all. No complaint. In case pending cr case, it is dismissed.
Bhikham Saini (Querist) 08 October 2013
Dear Experts,
In such case what are the options left to me for stopping sale and securing my share in the property.
Rajendra K Goyal (Expert) 08 October 2013
Repeated query:

http://www.lawyersclubindia.com/experts/----427631.asp#.UlP4aRCLq_I
Sarvesh Kumar Sharma Advocate (Expert) 08 October 2013
महोदय; सर्व प्रथम आपको हिन्दी भाषा में लेखन के लिए साधूवाद!
वास्तव में यह प्रकरण समय अवधि के बीत जाने के पश्चात का है;भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 /467 /468 जिस पर बनती थी वो स्वर्ग सिधार गया, अब 471 बनती भी है तब भी यह 420 के बिना अधूरी है; वस्तुतः जो कागजात आप प्रमाणित करना चाहते है आप को उसकी सत्यनिष्ठा संदेह से परे साबित करनी होगी!जब कर लें तभी कदम आगे बढ़ाए! मामला करीबी रिश्तेदारी का है ;दोनो पहलुओं को अच्छी तरह से बिचार ले!मेरे सुझाव में दीवानी वाद से बचें!फैसला आपका!
Raj Kumar Makkad (Expert) 09 October 2013
bhle hi aapke bhayee gujar chuke hain magar kyunki dhokhadri unke dwara shuru ki gyee aapke aur record ke sath heraferi unke dwara huee isliye bhle unke virudh kuchh na kiya ja skega magar fir bhi unka naam ka jikar hokar baki sab logo ke virudh fojdari mukdma banta hai aur vo swayam main seedh bhi hai.

Tau ji ka beta banar unki samptee apne naam kra li aur pita ji ki jagah kaat kar apna naam likh diya committee main mool dastavej ko chepakar to dosh to seedh hai.

Aap apne vkeel ki baat mankar aage bdhiye jaldi se


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