25% OFF on all LCI Courses. Offer valid till 5th Oct. Use Code: DUS25
LCI Learning

Share on Facebook

Share on Twitter

Share on LinkedIn

Share on Email

Share More

Adv Aneesh Trivedi 9424449500 (Advocate)     29 September 2016

My 498a judgement

ww.lawyersclubindia.com/forum/details.asp?mod_id=142514&offset=2

Attached File : _20160928091836_330481704_decision.pdf

I am attaching my judgment by some modifications: as it is recent judgmnet and under appeal perios so change of name and place is there please ignore soon original will be posted........

the judgment is attached in pdf form and  also in doc form it is copy pated below:

                                               1                               आप0प्र0क्र0ः-1670 /2009

न्यायालयः-श्री  भवानी बर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (म.प्र.)
आप0प्रकरण क्र.ः-1670 /2009
संस्थापन दिनांकः-06.10.2009
ब्ण्प्ण्ैण् छव ण्. 201-0032-2009

मध्यप्रदेश राज्य द्वारा आरक्षी केन्द्र,
कोतवाली, (म.प्र.)
                                      ---अभियोजन
//वि रू द्ध//

मनीष वेदी पुत्र मथुरा प्रसाद वेदी, उम्रु-44 वर्ष,
निवासी रघुनाथ नगर (म.प्र.)
                                           ----अभियुक्त
-निर्णय-
(आज दिनांक-23/09/2016 को घोषित)

1.     अभियुक्त पर भा.द.सं. की धारा-498’ए’ एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम
    1961 की धारा-4 के अंतर्गत आरोप है कि उसने दिनंाक 12.12.2008 से
    लगातार रिपोर्ट दिनांक 25.08.09 के मध्य स्थान ओल्ड एलआईजी.। मिशन
    कम्पाऊण्ड स्थित अभियुक्त का घर अंतर्गत थाना कोतवाली,    
    में फरियादी  सविता के पति होते हुए दहेज की मांग को लेकर फरियादी
    को शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित कर कू्ररता की तथा फरियादी
     सविता या उसके माता पिता से दहेज में तीन लाख रूपये की प्रत्य
    क्ष या परोक्ष रूप से मांग की।

2.     प्रकरण में यह स्वीकृत तथ्य है कि अभियुक्त मनीष वेदी फरियादी
    सविता  का पति है। यह भी स्वीकृत है कि मनीष और सविता  का विवाह
    दिनांक 11.12.2008 को हिंदू रीति रिवाज से जामनगर से संपन्न हुआ था एवं
    दिनांक 25.04.2009 को फरियादी सविता से थाना कोतवाली में सूचना
    देने के पश्चात् जामनगर चली गई थी। यह भी निर्विवादित है कि अभियुक्त द्व
    ारा दाम्पत्य अधिकारों की प्रत्यस्थापना हेतु एक आवेदन पत्र   न्यायाधीश
    के न्यायालय में दिनांक 27.07.2009 को प्रस्तुत किया। उक्त प्रकरण में
    न्यायालय द्वारा अंतिम आदेश दिनांक 03.02.2010 को पारित किया गया।
    जिसके अनुसार अभियुक्त के पक्ष में दाम्पत्य अधिकारों की प्रत्यस्थापना हेतु
    डिक्री पारित की गई।

3.     अभियोजन कथानक संक्षेप में इस प्रकार है कि फरियादी सविता  
    का विवाह दिनांक 11.12.2008 को मनीष वेदी से जामनगर से सपन्न हुआ
    था। इसके बाद मनीष वेदी उसे सीधे
    ले आया था और यहां उसने मेजर के पुत्र होने का फर्जी प्रमाणपत्र दिखाया,
    जिसके तहत!
    वह गैर कानूनी यात्राएं वगैर टिकिट करता था। उक्त पहचान पत्र में मनीष वेदी ने
    स्वयं को के.सी.पुरी पुत्र आर.के. पुरी बताया था। आर.के. पुरी चेन्नई रेजीमेंट में
    मेजर हैं इसी कार्ड के आधार पर उसने मोबाइल सिम आदि प्राप्त की, जबकि
    अभियुक्त के वास्तविक पिता पिंडवाड़ा में निवास करते हैं तथा रिटायर्ड जीवन
    व्यतीत कर रहे हैं। शादी के तुरंत बाद से मनीष उसे   लेकर आ गया
    जहां उसके परिवार का कोई भी सदस्य स्वागत हेतु नहीं था न ही कोई बाराती
      तक साथ आया।   आने पर फरियादी ने अभियुक्त के कहने पर
      के लाल मेमोरियल कालेज में सहायक प्राध्यापक के पद पर
    कार्य किया किन्तु अभियुक्त मनीष आये दिन पैसों के लिये उसके साथ मारपीट
    कर प्रताडित करता था। रात्रि 08 बजे के उपरांत गाली गलौच करना रोज का
    नियम बन गया। अभियुक्त तीन लाख रूपयों की मांग कर बात बात पर
    फरियादी को मारना पीटना शुरू कर देता था जिससे तगं आकर दिनाकं 25.
    04.09 को उसने कोतवाली में रिपोर्ट की और अपने मायके चली गई। किन्तु
    उसके अभियुक्त मनीष उसे मोबाइल से धमकी देने लगे तथा गदं े मैसेज भेजे।
    इसी बीच मनीष ने उसके विरूद्ध   न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत कर दिया
    तब फरियादी सविता  दिनांक 22.08.09 को   में आकर अपना दाम्पत्य
    जीवन व्यतीत करने लगी। इसके बाद भी अभियुक्त मनीष द्वारा पैसों की मांग
    की गई तब फरियादी ने कहा कि उसके पिता व भाई आयेंगे तो वही इस
    संबंध में कुछ बतलाएंगे। दिनांक 25.08.09 को फरियादी के पिता व भाई उसके
    घर आए तब मनीष ने पैसों के बावत् पूछा किन्तु पैसे नहीं लाने के कारण
    मनीष ने उसे मारपीट शुरू कर दी तथा उसके पिता व भाई को गाली बकते
    हुए घर से अपमानित कर निकाल दिया।

4.     दिनांक 25.08.09 को फरियादी  सविता ने पुलिस अधीक्षक  
    को एक लेखीय आवेदन दिया जिसके आधार पर थाना कोतवाली में अभियुक्त
    के विरूद्ध अपराध क्रमांक 71/09 धारा 498ए भादस. सहपठित धारा 3/4
    दहेज प्रतिषेध अधिनियम पर प्रथम सूचना रिपोर्ट लेख की गई और प्रकरण
    विवेचना में लिया गया। दौरान विवेचना घटनास्थल का नक्शामौका बनाया
    गया। फरियादी  सविता एवं साक्षी अशोक पुरी, गीता पुरी, गिरवर सिंह
    , मुन्नालाल के बताये अनुसार कथन लेख किये गये। लेपटाॅप व मोबाइल
    जब्तकर जब्तीपत्रक बनाया गया। अभियुक्त को गिरफ्तार कर गिरफ्तारी पत्रक
    बनाया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

5.     अभियुक्त ने अपराध करना अस्वीकार करते हुए निर्दोषिता का बचाव
    लिया। अभियुक्त परीक्षण अन्तर्गत धारा-313 दं.प्र.सं. में व्यक्त किया गया कि
    फरियादी के माता पिता के भडकाने व ईगो समस्या थी। फरियादी के घर  में
    नहीं रहना चाहती थी वह अभियुक्त को जामनगर या इंदौर में शिफ्ट कराना
    चाहती थी और फरियादी और उसके माता पिता उसे अपने घर घर जमाई
    बनकर रखना चाहते थे। दिनांक 19.08.2009 से 24.08.2009 तक वह इलाज
    हेतु अमरावती गया था   में मौजूद नहीं था। अभियुक्त ने उसे झूठा
    फसाया जाना व्यक्त किया है। बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्त मनीष वेदी
    (ब.सा.1) एवं साक्षी महेन्द्र (ब.सा.2) ने बचाव साक्षी के रूप में कथन किये
    हैं।

6.     प्रकरण के निराकरण हेतु निम्नलिखित विचारणीय बिन्दु हैंः-
(1)     क्या अभियुक्त ने दिनंाक 12.12.2008 से लगातार रिपोर्ट दिनांक 25.08.
    09 के मध्य स्थान ओल्ड एलआईजी.। मिशन कम्पाऊण्ड   स्थित
    अभियुक्त का घर अंतर्गत थाना कोतवाली,     में फरियादी
     सविता के पति होते हुए दहेज की मांग को लेकर फरियादी को
    शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित कर कू्ररता की?
(2)     उक्त दिनांक समय व स्थान पर फरियादी  सविता या उसके
    माता-पिता से दहेज में तीन लाख रूपये की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से
    मांग की ?
’’’’’ सकारण निष्कर्ष ’’’’’

7.     उपरोक्त विचारणीय बिन्दुओं के संबंध में आई साक्ष्य परस्पर अंतर्मिश्रित
    होने के कारण साक्ष्य के दोहराव से बचने के लिये इनका निराकरण एक साथ
    किया जा रहा है।

8.     साक्षी  सविता(अ.सा.1) का कहना है कि अभियुक्त के साथ
    विवाह के बाद अभियुक्त उसे   ले आया था जहां ससुराल पक्ष का कोई
    भी व्यक्ति नहीं मिला था। अभियुक्त के कहने से उसने लाल कालेज में
    सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्य किया। कुछ समय तक सब कुछ ठीक
    चलता रहा किन्तु इसके बाद अभियुक्त आये दिन उससे तीन लाख रूपये की
    मांग करने लगा और मांग को लेकर उसके साथ मारपीट करने लगा। साक्षी
    का कहना है कि उक्त मारपीट से तंग आकर दिनांक 25.04.2009 को वह
    थाना कोतवाली   में रिपोर्ट करके अपने मायके चली गई थी किंतु इसके
    बाद भी अभियुक्त उसे मोबाइल पर धमकी देता था और गंदे मैसेज भेजता था
    इसके बाद अभियुक्त ने धारा-9 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत  
    न्यायालय में एक आवेदन प्रस्तुत किया था तब दिनांक 22.08.2009 को वह
      आ गई थी और अभियुक्त के साथ रहने लगी थी।

9.     फरियादी का यह भी कहना है कि इसके बाद भी अभियुक्त उससे तीन
      लाख रूपये की मांग करता था और उसके साथ मारपीट करता था तब उसने
       अभियुक्त से कहा था कि जब उसका पिता व भाई आयेंगे तो वे इस संबंध में
बात करेंगे। दिनंाक 25.08.2009 को उसके पिता और भाई   आये थे तब
अभियुक्त ने उनके साथ गाली गलौच की थी और उसे घर से भगा दिया था।
तत्पश्चात् उसने अपने पिता और भाई के साथ थाना कोतवाली में लेखीय
आवेदन प्रदर्श पी.1 दिया था क्योंकि अभियुक्त उसे दहेज की मांग करके
शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताडिक कर रहा था। साक्षी ने यह भी बताया है
कि प्रदर्श पी.1 के आवेदन के आधार पर अभियुक्त के विरूद्ध थाना कोतवाली
में प्रदर्श पी.2 की प्रथम सूचना रिपोर्ट लेख की गई थी और पुलिस ने अनीष
को गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट के दूसरे दिन पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर
नक्शामौका प्रदर्श पी.3 बनाया था और मनीष के घर से लेपटाॅप और मोबाइल
जब्तकर जब्तीपत्रक प्रदर्श पी.4 बनाया था। साक्षी गीता पुरी (अ.सा.2) ने
फरियादी के पूर्वोक्त कथनों का यथावत समर्थन किया है और बताया है कि
उसकी पुत्री फरियादी सविता  ने उसे फोन पर जानकारी दी थी कि अभियुक्त
सविता  से पैसों की मांग कर रहा है।

10.      साक्षी मुन्नालाल (अ.सा.3) ने घटना के संबंध में कोई भी
    जानकारी होने से इनकार किया है। अभियोजन द्वारा पक्षद्रोही घोषित कर
सूचक प्रश्न पूछे जाने पर भी साक्षी ने अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं
किया है। इस प्रकार इस साक्षी के कथनों के आधार पर अभियोजन को कोई
बल प्राप्त नहीं होता है।

11.     साक्षी सरोज पुरी (अ.सा.4) का कहना है कि उसने दिनांक 25.08.09 को
    थाना कोतवाली     मंे फरियादी  सविताके आवेदन के आधार
    पर अभियुक्त मनीष के विरूद्ध अपराध क्रमांक 71/09 धारा 498ए भादवि. व
3/4 दहेज एक्ट के तहत मामला पंजीकर कर प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रदर्श पी.2
लेख की थी एवं प्रकरण की विवेचना के दौरान फरियादी  सविता साक्षी
अशोक पुरी, गीता, गिरवर व मुन्नालाल के कथन उनके बताये अनुसार लेख
किये थे। साक्षी ने दिनांक 26.08.09 को घटनास्थल का मौकानक्शा प्रपी.3
बनाना, दिनांक 28.08.09 को फरियादी सविता  से साक्षी गिरवर एवं अलीम के
सामने एक लेपटाप काले रगं का तथा एक मोबाइल जब्तकर जब्तीपत्रक प्रपी.4
बनाना तथा दिनंाक 26.08.09 को आरोपी मनीष को साक्षीगण के समक्ष गिरकर
गिर.पत्रक प्रपी.6 बनाना बताया है।

12.     बचाव पक्ष की ओर से साक्षी मनीष वेदी (ब.सा.1) का कहना है कि
    जीवन साथी मेट्रीमोनियल डाॅट काॅम पर फरियादी सविता  का प्रोफाइल आया
    था। प्रोफाइल की सारी जानकारियों से संतुष्ट होने के बाद सविता  के पिता
अशोक पुरी ने उसे मिलने के लिये सोहना बुलाया था तब वह वहां गया था
दोनों पक्षों की संतुष्टि के बाद दिनांक 11 दिसंबर 2008 को उसका विवाह
सविता  से तय हो गया था। साक्षी का यह भी कहना है कि इस बीच सविता
के माता पिता उसे देखने आये थे तब वह   में अकेला रहता था और
लाल कालेज मंे पढाता था। सविता  के माता पिता ने कालेज में जाकर
भी उसके बारे में पता किया था। दिनांक 11.12.08 को उसका व सविता  का
विवाह जामनगर से आदर्श विवाह के रूप में संपन्न हुआ था जिसमें उसके
परिवार के लोग भी शामिल हुए थे।

13.     साक्षी मनीष वेदी (ब.सा.1) ने यह भी बताया है कि उसकी सगाई 13.
11.08 से पूर्व ही उसने स्वयं सविता  का एडमीशन रामपुर में एम. फिल
ग्लोबल यूनिवर्सिटी में करा दिया था। शादी के बाद वे लोग नासिक,
त्रृयम्बकेश्वर घूमने भी गये थे। इस दौरान उनके बीच सब सामान्य था। सविता
के माता पिता के फोन आते थे कि   में अकेले मत रहो परिवार के साथ
सोहना आकर रहो। दिनांक 12 अप्रैल 2009 को सविता  की मां गीता पुरी
  आई थी। दिनांक 23 अप्रैल 2009 को वह सविता  की एम.फिल की
थीसिस जमा कराकर जबलपुर से घर वापिस आया तब तक गीता पुरी सविता
के सभी कीमती आभूषण चढावे का सामान वगैरह लेकर चली गई थी। इसके
बाद सविता  दो दिन उसके साथ रही थी लेकिन अचानक उसका व्यवहार
बिल्कुल बदल गया था। सविता  का कहना था कि उसने सविता  की मां की
बात नहीं मानी है।   छोटा शहर है यहां गोबर से लीपापोती करते हैं
उसका मन नहीं लगता। साक्षी ने यह भी बताया है कि दो दिन बाद दिनांक
25 अप्रैल 2009 को सविता  भी अकेले जामनगर चली गई थी। उसने सविता
को वापिस बुलाने का काफी प्रयास किया। दिनांक 03.05.09 को वह सविता
को लेने जामनगर गया था जहां सविता  के पिता ने उसके साथ गाली गलौच
और मारपीट की थी और उसे वापिस भगा दिया था उसके बाद भी एक दो
बार वह सविता  को लेने गया था। दिनांक 20 जुलाई 2009 को उसने इस
संबंध में पुलिस अधीक्षक   को आवेदन प्रदर्श डी.4 दिया था क्योंकि सविता
वापिस नहीं आ रही थी और उसे झूठे केस में फसाने की धमकी दे रही थी।

14.     साक्षी मनीष वेदी (ब.सा.1) ने यह भी बताया है कि दिनांक 15.08.09
    को उसके पेट में दर्द था डाक्टर ने बाहर दिखाने को कहा था तब वह
अमरावती चला गया था। दिनांक 19.08.09 से 24.08.09 तक डा. रामजी मिश्रा
के राजर्सली अस्पताल में भर्ती रहा था, 24 तारीख को डिस्चार्ज होने के बाद वह
25 तारीख को   आ गया था। उसी दिनांक को शाम के समय उसके पास
एएसआई. सरोज पुरी का कोतवाली थाने से फोन आया कि उसको सुलह के
लिये बुलाया है जब वह थाना पहुंचा तो सरोज पुरी ने उसे गिरफ्तार कर
लिया था और उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया था। साक्षी का कहना है कि
वह तीन दिन जेल में रहा था और जब वापिस आया था तो पुलिस वाले उसके
घर का ताला तोडकर घर का सामान ले गये थे। जिसके संबंध में उसने
टीआई. साहब को भी शिकायत की थी। उसने पुलिस अधीक्षक और अन्य
प्राधिकारियों को भी इस संबंध में शिकायत की थी जिसपर सरोज पुरी के
खिलाफ कार्यवाही की गई थी। साक्षी का कहना है कि उसने सविता  के साथ
कोई मारपीट या प्रताडना नहीं की और न ही दहेज की मांग की थी बल्कि
शादी के समय उसने ही स्वयं पैसे खर्च किये थे।

15.     साक्षी मनीष वेदी (ब.सा.1) ने अपने कथनो के समर्थन मंे फरियादी
    सविता  द्वारा थाना कोतवाली में की गयी रिपेार्ट दिनांक 25.04.09 प्रदर्श डी 5,
    वर्तमान प्रकरण में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने से पूर्व दि0 24.06.09 को उप
    निरी0 सरोज पुरी द्वारा परामर्श कार्यवाही हेतु उसे दिया गया सूचना पत्र प्रदर्श
    डी 6, पुलिस अधीक्षक नागपुर को दिया गया लिखित आवेदन प्रदर्श डी 7,
थाना जामनगर में टीआई. को दिया गया लिखित आवेदन प्रदर्श डी.8, दिनांक
21.07.09 को पुलिस अधीक्षक नागपुर को भेजे गये आवेदन की प्रमाणित प्रति
प्रदर्श डी.9, नागपुर मे कराये गये ईलाज का पर्चा प्रदर्श डी.10, फरियादी
सविता  को लेने के लिये नागपुर जाने के लिए   से नागपुर और
जामनगर जाने आने की टिकिट प्रदर्श डी.11 लगायत प्रदर्श डी.15 की प्रमाणित
प्रतियां प्रस्तुत की गयी है।

16.     साक्षी का कहना है कि सविता  अपनी स्वयं की इच्छा से लाल
    कालेज में पढाती थी जिसके लिये उसने सविता  पर कोई दबाब नहीं बनाया
    था लाल कालेज से सविता  को दिया गया अनुभव प्रमाणपत्र की प्रमाणित
    प्रति प्रडी.16, उसके द्वारा सविता  को साथ रखने के लिये दिनांक 27 जुलाई
    2009 को   न्यायालय   में हिंदू विवाह अधि0 की धारा-9 के अंतर्गत
    प्रस्तुत प्रकरण की आदेश पत्रिकाओं की प्रमाणित प्रति प्रडी.17, आवेदन पत्र की
प्रमाणित प्रति प्रडी.18 प्रकरण में न्यायालय का आदेश दिनांक 03.02.10 की
प्रमाणित प्रति प्रडी.19, डिक्री की प्रमाणित प्रति प्रडी.20 प्रस्तुत की है। इसके
अलावा दिनांक 15 अगस्त 2009 को अभियुक्त का स्वास्थ्य खराब होने पर
  से रेफर का पर्चा प्रडी.21, अमरावती से वापस आने के बाद चेकप कराने
के संबंध में इलाज का पर्चा दिनाक 18.10.09 प्रडी.22,   से अपरावती आने
और जाने का टिकिट प्रडी.23 व प्रडी.24, 25 व 26, अमरावती में भर्ती रहने के
दौरान   के प्रेस्क्रिप्सन की पर्चिया प्रडी.27 लगायत प्रडी.31, चिकित्सक द्व
ारा दिया गया प्रमाण पत्र प्रडी.32, संपूर्ण घटनाक्रम के संबंध में अभियुक्त द्वारा
जन सुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक   को पुनः दिया गया आवेदन पत्र
प्रडी.35, दिनांक 08.09.09, 15.09.09 को दिया गया आवेदन प्रडी.36 एवं प्रडी.37
प्राचार्य लाल कालेज को दिया गया आवेदन पत्र प्रडी.38, दिनांक 22.09.
09 को अपराध में खातमा कार्यवाही करने हेतु पुलिस अधीक्षक को दिया गया
आवेदन दिनांक 22.09.09 प्रडी.39, पुलिस महानिरीक्षक सागर को सविता  के
माता पिता के विरूद्ध आपराधिक कार्यवाही करने हेतु दिनांक 29.09.09 को
दिया गया आवेदन पत्र प्रडी.40, सविता  द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रकरण में
समुचित जांच के बिना उसे गिरफ्तार करने के संबंध में उसके द्वारा दिये गये
आवेदन पत्र पर उप निरी. सरोज पुरी के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए पुलिस
अधीक्षक   द्वारा दिनांक 23.08.13 को किया गया आदेश कि सरोज पुरी
की सेवा पुस्तिका मंे निदंा के दडं से दंिडत करने का इदं्राज किया जाये, के
प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति प्रडी.41 है तथा आदेश प्रडी.42 के दस्तावेज भी
अभियुक्त ने अपने कथनों के समर्थन मंे प्रस्तुत किये हैं।

17.     भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए किसी महिला के प्रति उसके पति
    या नातेदारों द्वारा की गई कू्ररता को दंडनीय अपराध होना उपबंधित करती है।
    उक्त धारा में दिये गये स्पष्टीकरण में क्रूरता शब्द को परिभाषित किया गया
    है। जिसके अनुसार ’’क्रूरता से अभिप्रेत है-(ए) जानबूझकर किया गया कोई
आचरण जो ऐसी प्रकृति का है जिससे उस स्त्री को आत्महत्या के प्रेरित करने
की या उस स्त्री को जीवन अंग या स्वास्थ्य को (जो चाहे मानसिक हो या
शारीरिक) गंभीर क्षति या खतरा कारित करने की संभावना है या (बी) किसी
स्त्री को इस दृष्टि से तंग करना कि उसको या उसके किसी नातेदार को
किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की कोई मांग पूरी करने के लिये प्रपीड़ित
किया जाये या उस स्त्री को इस कारण तंग करना कि उसका नातेदार ऐसी
मांग पूरी करने में असफल रहा हो।’’ हस्तगत प्रकरण में धारा-498ए भादस. के
स्पष्टीकरण के द्वितीय खण्ड के अंतर्गत अभियुक्तगण पर दहेज की मांग करने
और उक्त मांग को लेकर फरियादी के साथ क्रूरता करने का आक्षेप है।

18.     साक्षी  सविता(असा01) ने बताया है कि वह अपनी शादी के
    पहले भी स्वेच्छ्या से केन्द्रीय विद्यालय जामनगर और सिटी हायर
    सेकेण्डरी स्कूल में शिक्षण का कार्य करती थी। साथ ही यह भी बताया है कि
अभियुक्त से अलग होने के बाद भी वह अध्यापन का कार्य करती है। स्वयं
साक्षी ने अपने मुख्य परीक्षण में बताया है कि अभियुक्त के कहने से वह
लाल कालेज में वह असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य करती थी किंतु
साक्षी का ऐसा कहना नहीं हैं कि उक्त कार्य करने के लिए अभियुक्त ने उस
पर किसी भी प्रकार से दबाव बनाया था। यह उल्लेखनीय है कि साक्षी एम.ए.
बी.एड. कर चुकी उच्च शिक्षक महिला है जो कि अभियुक्त के साथ रहने से
पूर्व एवं पश्चात स्वेच्छ्या से अध्यापन का कार्य कर रही है, ऐसी दशा मे यह
नहीं माना जा सकता कि पैसों की मांग की पूर्ति के लिए अभियुक्त ने फरियादी
पर नौकरी करने के लिए किसी प्रकार का दबाव बनाया था या क्रूरता की थी।
स्वयं परिवादी की माॅ गीता पुरी (असा02) ने यह स्वीकार किया है कि स्वयं
अभियुक्त मनीष ने फरियादी से सगाई से पश्चात उसका दाखिला एम.फील के
कोर्स में अध्ययन हेतु कराया था,जो कि यह दर्शित करता है कि अभियुक्त
मनीष और फरियादी दोनों ही शिक्षण के क्षेत्र में कार्यरत थे और उच्च शिक्षा
प्राप्त करने हेतु प्रयासरत थे।

19.     साक्षी सविता  (असा01) एवं गीता पुरी (असा02) ने अपने कथनों में ऐसा
    कहीं भी व्यक्त नहीं किया है कि अभियुक्त ने शादी से पूर्व या शादी के समय
    किसी भी प्रकार के दहेज की मांग की थी अथवा ऐसी किसी मांग की पूर्ति
    विवाह के समय की गयी थी। दोनों ही साक्षियों ने यह स्वीकार किया है कि
    अभियुक्त और फरियादी के विवाह का संबंध मेट्रोमोनियल साईट डाले गये
उनके बायोडाटा से संतुष्ट होने के बाद प्रारंभ हुआ था। साक्षी गीता पुरी ने पद
क्रमांक-7 में बताया है कि उसने फरियादी के विवाह के संबंध मे दिये गये
विज्ञापन में यह स्पष्ट लेख कराया था कि विवाह के लिए ऐसे वर की
आवश्यकता है जो दहेज की अपेक्षा न करता हो। फरियादी सविता  ने स्वीकार
किया है कि विवाह के बाद वह और मनीष त्रयम्बकेश्वर, नासिक और इंदौर,
देवास गये थे अर्थात् विवाह के ठीक बाद भी फरियादी और अभियुक्त का
वैवाहिक जीवन सामान्य था। उक्त से यह दर्शित है कि अभियुक्त द्वारा विवाह
के ठीक पूर्व विवाह के समय एवं विवाह के ठीक पश्चात किसी भी दहेज की
मांग नहीं की गयी थी।

20.     फरियादी सविता  ने बताया है कि अभियुक्त शादी के कुछ दिन बाद से
    आये दिन तीन लाख रूपये की मांग करता था और उक्त मांग को लेकर
    उसके साथ मारपीट करता था किन्तु फरियादी द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया
है कि विवाह के कितने समय बाद से उक्त दहेज की मांग प्रारंभ की गयी थी।
दहेज की मांग और क्रूरता के संबंध में फरियादी ने कोई विनिर्दिष्ट समय,
स्थान दिनांक या कोई विनिर्दिष्ट घटना अनुक्रम अपने कथनों में नहीं बताया है
बल्कि दहेज की मांग करने और मारपीट करने का औपचारिक कथन मात्र
किया है। साक्षी गीता पुरी का कहना है कि शादी के बाद चार पाॅच दिन
सविता  अभियुक्त के साथ रही थी उसके बाद अभियुक्त स्वयं सविता  को लेकर
जामनगर आया था। आगे साक्षी का कहना है कि शादी के बाद वह अभियुक्त
और सविता  के साथ रहने   आयी थी। जिसके संबंध में साक्षी ने
स्पष्टीकरण दिया है कि सविता  के पैर का आॅपरेशन हुआ था जिसकी सेवा
करने के लिए वह   आयी थी और चार दिन रूकी थी। पद क्रमांक 18 में
साक्षी गीता पुरी का कहना है कि उस समय भी अभियुक्त और सविता  के बीच
खटपट चल रही थी। पद क्रमांक 25 में साक्षी ने बताया है कि अभियुक्त ने
कभी भी उसके सामने सविता  से दहेज की मांग नही की। साक्षी स्वतः व्यक्त
करती है कि रात के समय दोनों के बीच खटपट चलती रहती थी।

21.     इस प्रकार साक्षी गीता पुरी के कथनो से प्रकट है कि वह शादी के ठीक
    बाद अभियुक्त और फरियादी के साथ उनके घर मे आकर रही एवं दिनांक
    25.04.09 जबकि फरियादी थाने में रिपोर्ट करके मायके जाना बताती है, उससे
    ठीक पूर्व भी गीता पुरी फरियादी और अभियुक्त के साथ   में रही थी।
यदि अभियुक्त द्वारा लगातार फरियादी से तीन लाख रूपये की मांग की जाती
थी और उक्त मांग को लेकर फरियादी की मारपीट करके उसके प्रति कू्ररता
की जाती थी तब ऐसा संभव नहीं था कि उसी घर मंे रहते हुए गीता पुरी के
ज्ञान में यह बात न आती क्योकि स्वयं इस साक्षी ने अपने कथनों में बताया है
कि सविता  ने दहेज की मांग के संबंध मे उसे फोन पर सूचना दी थी। साथ
ही इस साक्षी के कथनों से यह भी स्पष्ट हेाता है कि अभियुक्त और फरियादी
के मध्य आपसी बातों को लेकर सामान्य अनबन या विवाद हुआ था।

22.     दिनांक 25.04.09 को फरियादी द्वारा की गयी रिपोर्ट को यद्यपि
    अभियोजन द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अथवा प्रमाणित नहीं कराया गया है
    तथापि उक्त रिपोर्ट को स्वयं बचाव पक्ष ने प्रदर्श डी. 5 के रूप में प्रमाणित
    कराया है जिसे फरियादी सविता  ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट करना स्वीकार
किया है कि प्रदर्श डी. 5 के अवलोकन से प्रकट है कि उक्त रिपोर्ट में
फरियादी ने थाने पर इस आशय की सूचना दी है कि वह अपनी मर्जी से अपने
माता पिता के घर पहनने के कपडे और आवश्यक दस्तावेज लेकर जा रही है
किन्तु उक्त रिपेार्ट में अभियुक्त द्वारा दहेज की मांग करने अथवा फरियादी के
साथ मारपीट करने का कोई भी उल्लेख नहीं है। फरियादी स्वयं शिक्षित
महिला होकर प्रोफेसर के रूप मे कार्यरत थी, ऐसी दशा में जबकि फरियादी
अपने जीवन से तंग होकर मायके जाना बताती है तब इसका कोई कारण नहीं
था कि फरियादी द्वारा थाना कोतवाली में अपने साथ घटित हुई घटना का
कोई भी उल्लेख न किया जाता।

23.     अभिलेख पर उभय पक्ष के मध्य चले प्रकरण अंतर्गत धारा 9 हिन्दू
    विवाह अधिनियम में   न्यायाधीश   मे पारित आदेश दिनांक 03.02.10
प्रदर्श डी 19 मौजूद है, जिसमें स्वयं न्यायालय द्वारा भी इस बात का स्पष्ट
उल्लेख किया गया है कि दिनांक 22.08.09 को उक्त प्रकरण न्यायालय के
समक्ष लंबित था किंतु न्यायालय के समक्ष फरियादी या उसके पिता ने मारपीट
के संबंध मे न तो कोई जानकारी दी और न तो कोई आवेदन प्रस्तुत
किया। यद्यपि उक्त तथ्य वर्तमान प्रकरण में विचारणीय बिंदुओ के संबंध में
प्रत्यक्ष रूप से सकारात्मक या नकारात्मक निष्कर्ष निकालने हेतु बहुत अधिक
महत्वपूर्ण नहीं है तथापि न्यायालय को इस पर तो विचार अवश्य ही करना
होंगा कि फरियादी के पास उसके साथ घटित घटना को उचित स्तर पर
उठाने अथवा सक्षम प्राधिकारी को सूचित करने का अवसर होते हुए भी
फरियादी ने ऐसा नहीं किया। फरियादी द्वारा पति के घर से जामनगर जाने के     बाद भी जाम नगर मे भी किसी थाने पर या पुलिस अधिकारी को घटना के संबंध     में जानकारी नहीं दी है।

24.     इस बिंदु पर फरियादी को दौरान प्रतिपरीक्षण चुनौती दिये जाने पर पद
    क्रमांक 12 में फरियादी बताती है कि अभियुक्त ने जान से मारने की धमकी दी
    थी इसलिए डर के कारण उसने उक्त बाते रिपोर्ट मे नही लिखायी थी। आगे
    साक्षी बताती है कि अभियुक्त ने उसके उपर सिल बट्टा फेका था इसी कारण
उसकी माॅ   आयी थी। पद क्रमांक 14 में सविता  ने बताया है कि दिनांक
25.04.09 को वह और मनीष दोनों कालेज पढ़ाने गये थे और वह काॅलेज से
सीधा थाने रिपेार्ट लिखाने चली गयी थी जहां से पुलिस वालों के साथ ही
अपने घर आयी थी और पुलिस वाले ही उसे जामनगर तक छोड़ने गये थे इस
प्रकार यदि रिपोर्ट लिखाने से ठीक पूर्व फरियादी अपने कालेज गयी थी और
फिर उसे पुलिस सहायता भी प्राप्त हो चुकी थी तब ऐसा नहीं माना जा सकता
कि फरियादी इस सीमा तक भयाक्रंात हो चुकी थी कि उसके साथ घटित
वास्तविक घटना का उल्लेख नहीं करती।

25.     पद क्रमांक 19 में फरियादी सविता  बताती है कि अभियुक्त द्वारा उसके
    विरूद्ध धारा 9 के अंतर्गत जो मामला लगाया गया था उसका नोटिस मिलने के
    बाद वह न्यायालय मे उपस्थित हुई थी किंतु साक्षी ने इस बात से इंकार किया
    है कि उक्त प्रकरण की नोटिस की जानकारी होने के बाद उसने अभियुक्त के
विरूद्ध एफ.आई.आर. लिखायी थी। यह उल्लेखनीय है कि प्रदर्श पी.1 का
आवेदन पत्र दिनांक 25.08.09 को थाने पर दिया गया है जिसके आधार पर
प्रथम सूचना रिपेार्ट प्रदर्श पी.2 पंजीबद्ध की गयी है जबकि अभियुक्त द्वारा धारा
9 के अंतर्गत आवेदन प्रदर्श डी. 18 दिनांक 27.07.09 को न्यायालय मे प्रस्तुत
किया गया था, जिसमें उपस्थिति के लिए जारी सूचना पत्र प्राप्त हो जाना स्वयं
फरियादी ने स्वीकार किया है। जिससे यह परिलक्षित होता है कि उक्त प्रकरण
की जानकारी प्राप्त होने के बाद भी फरियादी द्वारा प्रदर्श पी.1 का आवेदन पत्र
थाने पर दिया गया था और इसके पूर्व दहेज की मांग या प्रताड़ना से संबंधित
कोई भी रिपेार्ट नहीं की थी।

26.     बचाव पक्ष द्वारा साक्षी मनीष (बसा01) की साक्ष्य में दिनांक 19.08.09 से
    24.08.09 तक उसके शहर से बाहर होने के संबंध में प्रदर्श डी.21 लगायत
    प्रदर्श डी.32 के विभिन्न चिकित्सा संबंधी दस्तावेज और टिकिट प्रस्तुत किये
    गये है किंतु उक्त पर्चे संबंधित चिकित्सक या तैयार करने वाले व्यक्ति द्वारा
    प्रमाणित नहीं कराये गये हैं। दस्तावेजों पर मात्र मनीश वेदी नाम लिखे होने
के आधार पर उक्त दस्तावेजो की सत्यता प्रमाणित नही होती है। इसी प्रकार
अभियुक्त द्वारा थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक को   एवं नागपुर में
दिये गये आवेदन पत्र के आधार पर उसके विरूद्ध किये गये आक्षेप अप्रमाणित
नहीं होते तथापि उक्त आवेदन पत्रों से यह निष्कर्ष अवश्य निकाला जा सकता
है कि अभियुक्त को उसके विरूद्ध आपराधिक कार्यवाही संस्थित किये जाने की
प्रत्याशंका थी। जिस कारण उसमें उक्त आवेदन पत्र प्रदर्श डी 4,7,8,9 आदि
प्रस्तुत किये थे किंतु उक्त आवेदन पत्रों के आधार पर भी अभियुक्त को कोई
लाभ प्राप्त नहीं होता है।

27.     आपराधिक प्रकरणों मे अभियोजन अपना मामला स्वयं संदेह से परे
    प्रमाणित करना होता है, ऐसे प्रकरण मे बचाव पक्ष द्वारा साक्ष्य प्रस्तुति मे की
    गयी चूक या लोप का अभियोजन को कोई लाभ प्रदान नहीं किया जा सकता
    है। प्रकरण मे बचाव पक्ष का यह महत्वपूर्ण तर्क है कि विवेचक श्रीमती सरोज
पुरी द्वारा फरियादी सविता  की रिश्तेदार होने के कारण त्रुटिपूर्ण विवेचना की
गयी है। इस संबंध मे इस साक्षी को दौरान प्रतिपरीक्षण सुझाव दिये जाने पर
साक्षी ने इस बात से स्पष्ट इंकार किया है कि फरियादी उसकी रिश्तेदार है।
चूंकि दिनांक 25.08.09 को श्रीमती सरोज पुरी महिला डेस्क प्रभारी थाना
कोतवाली थी अतः उनके द्वारा मामला पंजीबद्ध करना और उसमें विवेचना की
जाना दुराशय पूर्ण नही माना जा सकता है। यद्यपि यह सही है कि फरियादी
सविता  उसकी रिपेार्ट दिनांक 25.08.09़ के ठीक बाद अभियुक्त को गिरफ्तार
करना बताती है जबकि प्रदर्श पी 6 के गिरफ्तारी पत्रक के अनुसार अभियुक्त
को दिनांक 26.08.09 को गिरफ्तार किया गया है।

28.     साक्षी ने स्वीकार किया है कि उभय पक्ष के मध्य परामर्श कार्यवाही के
    विफल होने के बाद ही प्रथम सूचना रिपेार्ट लेख की गयी थी और उक्त
    परामर्श कार्यवाही के दौरान उसे अभियुक्त द्वारा पुलिस अधीक्षक आदि को दिये
गये आवेदन पत्रांे की जानकारी हो गयी थी। उक्त परामर्श कार्यवाही से
संबंधित कोई भी दस्तावेज अभियोजन की ओर से प्रस्तुत अथवा प्रमाणित नही
कराये गये है जिनके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि प्रथम सूचना
रिपेार्ट पंजीबद्ध होने के पूर्व पक्षकारो में मध्य वास्तविक विवाद की क्या
परिस्थितियाॅ थी तथापि प्रदर्श डी.6 के सूचना पत्र से दर्शित है कि दिनांक
24.06.09 को सूचना पत्र जारी कर दिनांक 07.08.09 को परामर्श हेतु उपस्थित
रहने के लिए विवेचक श्रीमती सरोज पुरी द्वारा नोटिस जारी किया गया था
चूंकि उक्त परामर्श की कार्यवाही वर्तमान प्रकरण की प्रथम सूचना रिपेार्ट प्रदर्श
पी.2 पंजीबद्ध होने से ठीक पूर्व की है एवं प्रदर्श डी 4,7,8 एवं 9 के आवेदन
पत्रों की जानकारी विवेचक को हो चुकी थी तब निश्चित रूप से उक्त
कार्यवाही में विचार मे लियंे गये बिंदु महत्वपूर्ण है, जिन्हें अभियोजन की ओर से
प्रमाणित नहीं कराया गया है।

29.     अभियुक्त द्वारा वर्तमान प्रकरण में विवेचक श्रीमती सरोज पुरी द्वारा
    त्रुटिपूर्ण कार्यवाही करने के संबंध में प्रदर्श डी 42 का दस्तावेज प्रस्तुत किया
    गया है जो कि अभियुक्त के आवेदन पर विवेचक के विरूद्ध की गयी कार्यवाही
    से संबंधित सूचना का अधिकार के अंतर्गत का आदेश है, उक्त प्रदर्श डी 42
का आदेश विवेचक के विरूद्ध की गयी विभागीय कार्यवाही में पारित आदेश है
जिसमें जाॅच उपरांत यह पाये जाने का उल्लेख है कि विवेचक श्रीमती सरोज
पुरी द्वारा वर्तमान प्रकरण में दिनांक 25.08.09 को अपराध क्रमांक 601/09 पर
प्रथम सूचना रिपेार्ट पंजीबद्धकर अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था
जबकि उसके पूर्व दिनांक 27.07.09 को अभियुक्त ने दाम्पत्य संबंधों की पुन-
सर््थापना हेतु न्यायालय में आवेदन लगाया था विवेचक द्वारा इस प्रकरण में
तलाशी के दौरान विधि उपबंधों का पालन न किये जाने और बिना जाॅच के
अभियुक्त को तत्काल गिरफ्तार किये जाने के संबंध मे उपेक्षा पायी जाने के
कारण उसे निंदा के दण्ड से दण्डित किया गया है। इस प्रकार यद्यपि प्रदर्श
डी. 42 का आदेश इस न्यायालय पर किसी भी प्रकार से बंधनकारी नहीं है
तथापि उक्त से यह स्पष्ट होता है कि विवेचक द्वारा विधि के प्रक्रियात्मक
उपबंधों का पालन न करते हुए अभियुक्त के विरूद्ध कार्यवाही की गयी थी।
30. बचाव पक्ष की ओर से कई न्यायदृष्टांत प्रस्तुत किये गये है जिनमे से
वर्तमान प्रकरण से सुसंगत ‘‘न्याय दृष्टांत गनानाथ पटनायक वि. उड़ीसा
राज्य (2002)1 एस.सी.आर.845‘‘ प्रस्तुत किया गया है जिसमें यह अवधारित
किया गया है कि अभियुक्त द्वारा पीडित के साथ कू्ररता किये जाने के संबंध में
विश्वसनीय साक्ष्य विद्यमान नहीं है, वहां धारा 498ए भादस के अंतर्गत
दोषसिद्धी नहीं की जा सकती है।

31.     न्यायदृष्टांत ‘‘शैलेन्द्रसिंह वि. म.प्र.राज्य 2005(दो) एम.पी.एल.जे.
    224‘‘ में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा यह अवधारित किया गया है कि पति
    अथवा नातेदारो द्वारा किया गया प्रत्येक हमला या प्रताड़ना धारा 498ए भादसं
के अंतर्गत क्रूरता की परिधि में नहीं आती है, किसी आशय की अवधारणा न्याय
दृष्टांत ’’सरला प्रभाकर विरूद्ध महाराष्ट्र राज्य 1990 सी.आर.एल.जे.
407’’ मंे भी की गयी है। इसी प्रकार बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत न्याय
दृष्टांत ‘‘रीता शर्मा एवं अन्य वि. मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य (2014)1 एमपी.
डब्ल्यू.एन.86‘‘ में यह अवधारित किया गया है कि धारा 498क एवं दहेज
प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत अपराध में विनिर्दिष्ट तिथि समय व स्थान प्रथम
सूचना रिपेार्ट मे लिखित नहीं किया गया, ऐसी रिपोर्ट अभिखण्डित किए
जाने योग्य है।

32.     पूर्वोक्त न्यायदृष्टांत मे अवधारित विधि के सापेक्ष वर्तमान प्रकरण की
    परिस्थितियों का अवलोकन करें तो स्पष्ट होता है कि फरियादी सविता  त्रिवेदी
    ने अभियुक्त द्वारा उससे दहेज की मांग करने एवं प्रताड़ित किये जाने के संबंध
    मे कोई भी विर्निर्दिष्ट घटना दिनंाक, समय, स्थान या घटना अनुक्रम नहीं
    बताया है बल्कि दहेज की मांग और कू्ररता को औपचारिक कथन मात्र किया
    हैं। सर्वप्रथम अवसर पर दिनांक 25.04.09 को और उसके बाद उपलब्ध अवसरो
पर भी फरियादी ने अभियुक्त के विरूद्ध केाई रिपेार्ट न करते हुए, अभियुक्त द्व
ारा न्यायालय में धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुति के
पश्चात प्रथम सूचना रिपेार्ट दिनांक 25.08.09 थाने पर लेख करायी थी।
फरियादी की माॅ गीता पुरी ने उसके समक्ष दहेज की मांग या क्रूरता का कोई
कथन नहीं किया है। अभियुक्त द्वारा विवाह के समय विवाह के पूर्व एवं ठीक
पश्चात दहेज की मांग किये जाने का मामला अभियोजन का नही है इसके
विपरित स्वयं गीता पुरी (असा02) ने यह स्वीकार किया है कि अभियुक्त ने
उसकी शादी के पूर्व खरीददारी के लिए चैक के माध्यम से रूपये दिये थे।
जिसके संबंध मे दिया गया स्पष्टीकरण कि मनीष ने उसे दिये गये पैसे चैक
के माध्यम से लौटाये थे, स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है।

33.     फरियादी का कोई भी मेडीकल रिपोर्ट अथवा किसी स्वतंत्र साक्षी की
    समर्थनकारी साक्ष्य भी अभिलेख पर नहीं है। प्रदर्श पी.1 के आवेदन पर के
    अनुरूप दिनांक 25.08.09 को अभियुक्त द्वारा फरियादी की मारपीट किये जाने
    का कोई भी कथन फरियादी सविता  ने अपने न्यायालयीन कथनों में नहीं किया
है। अभियोजन साक्षी गिरवरसिंह जिसे फरियादी अपना मूह बोला भाई बताती है
उसे अभियोजन की ओर से परीक्षित नही कराया गया है, जहां तक अभियुक्त
द्वारा फर्जी पहचान पत्र तैयार करना और उसका दुरूपयोग करने का प्रश्न
है यह बिंदु न तो वर्तमान प्रकरण मे विचारणीय है और न ही इस संबंध में
अभियुक्त पर कोई आरोप विरचित किया गया है, अतः इस पर विवेचना किया
जाना औचित्यहीन होगा।

34.     पूर्वोक्त के आधार पर अभियोजन यह प्रमाणित कर पाने मंे असफल रहा
    है कि अभियुक्त ने दिनंाक 12.12.2008 से लगातार रिपोर्ट दिनांक 25.08.09 के
मध्य स्थान ओल्ड एलआईजी.। मिशन कम्पाऊण्ड   स्थित अभियुक्त का घर
अंतर्गत थाना कोतवाली,     में फरियादी  सविता के पति
होते हुए दहेज की मांग को लेकर फरियादी को शारीरिक एवं मानसिक रूप से
प्रताड़ित कर कू्ररता की तथा फरियादी  सविता या उसके माता पिता से
दहेज में तीन लाख रूपये की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मांग की। फलतः
अभियुक्तगण मनीष वेदी पुत्र मथुरा प्रसाद वेदी को भा.द.वि. की
धारा 498’ए’ एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा-4 के आरोप
से दोषमुक्त किया जाता है।

35.     अभियुक्त के जमानत एवं मुचलके भारहीन किये जाते है।

36.     अभियुक्त प्रकरण के अनुसंधान अथवा विचारण के दौरान अभियुक्त
    दिनांक 26.08.09 से 29.08.09 तक न्यायिक निरोध में रहा है। तत्संबंध में
    धारा-428 दं.प्र.सं. का प्रमाण पत्र पृथक से प्रकरण में संलग्न किया जाये।
निर्णय खुले न्यायालय में घोषित किया गया।
मेरे निर्देशन में टंिकत किया।

    न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी,                            न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी,
              (म.प्र.)                                                   (म.प्र.)
            23.09.16                                                 23.09.16



Learning

 12 Replies

sai narayana   29 September 2016

can someone translate it in english..

whatnot   29 September 2016

translate.google.com

 

Last point

 

34. On the basis of the aforesaid in the prosecution failed to prove it
    12/12/2008 consistently report that accused Dinanak date of 25/08/09
Old LIG central location .. Kmpaund accused the mission house
Under Kotwali police station, the complainant Savita's husband
While demanding dowry complainant physically and mentally
Savita Kurrta harassing the complainant and his or her parents
Three lakh dowry demands directly or indirectly. Eventually
Accused son Manish altar altar Mathura Prasad Bakdkvik Of
Section 498'a 'and Section 4 of the Dowry Prohibition Act, 1961, on charges of
Is absolved of.


35. The accused's bail and sureties are weightless.

36. During the trial the accused or the accused's research Case
    From 08/26/09 to 29/08/09 is the date in judicial detention. As such
    Section -428 Dnkprksnk The certificate should be attached in a separate case.
The decision was announced in open court.
I was typing direction.

 

 

Congragulation.

You are a fighter.

 

ALL the best in future endevour

Adv Aneesh Trivedi 9424449500 (Advocate)     29 September 2016

thank you whatnot sir

 

sai narayana   29 September 2016

Brother first of all congratulation.

You were put into jail for some period?? May be that's instigated you to fight such vigorously. Anything can be condonable but putting her own husband into jail is unpardonable and it's more than enough to obtain divorce under cruelty grounds.


(Guest)

Congratulations. wish you a great life ahead!!

Adv Aneesh Trivedi 9424449500 (Advocate)     29 September 2016

@ sai narayana and @kindness

thanksir

i posted one query seperately again i am asking the same: here

I got aquittal in 498A the judgments is in the link here i change names of parties : as it is new and under appeal period but still  posted it here so changes are made it is as: given below and in link:

my query is can I file case under IPC 182 and IPC 211 now ?

someone from court suggested me that as decision comes so you can not file it now, this was the procedure before starting of tral now it is too late for IPC 182 and 211,

but  i said at that time i was in jail and i had no so much proof to go for IPC 182 and 211, now in decisioni it self it comes out so that i can file it now.

now do guide me here can i file it now or not ?


(Guest)

1. The accused Bakdksnk  Section-498'a 'and Dowry Prohibition Act
 1961 under Section 4 of the charges that he Dinanak 12/12/2008
 The central location of Old consistently report dated 25/08/09 LIG ..  Mission
 Kmpaund Kotwali police station under the house of the accused,
 Savita's husband, while the complainant complainant demanding dowry
 Physically and mentally tortured and complainant of Kurrta
 Savita or three lakh dowry from her parents Prefix
 Q or indirectly demanded.

 2. In case it is an admitted fact that the complainant accused Manish altar
 Savita's husband.  It is also accepted that Manish and Savita married
 Dated 11.12.2008 was concluded and from Hindu rituals Jamnagar
 Kotwali police station informed the complainant of Savita Date 4/25/2009
 After giving went Jamnagar.  It is also undisputed that the accused DW
 An application by the judge for conjugal rights Prtysthapana
 Dated 07.27.2009 submitted to the court.  In the said case
 The final order dated 02.03.2010 passed by the court.
 Prtysthapana conjugal rights in favor of the accused, according to which the
 The decree was passed.

 3. The complainant Savita prosecution story in brief is as follows
 11.12.2008 Date of the marriage altar Manish was Spnn from Jamnagar
 Was.  Then Manish altar directly
 He was brought here to be the son of Major showed a forged certificate,
 under which!
 He had tickets Vgar illegal trips.  The identity Manish altar
 RK son himself Keksikpuri  Puri said.  RK  Puri Chennai regiment
 Major on the corresponding card of the mobile SIM etc., while
 Pindvadha accused live in the real father and retired life
 Are able to lead.  Manish has brought him within marriage
 Where any member of his family was not welcome no Barati
 Came together.  Complainant to come at the behest of the accused
 Memorial College to the rank of Assistant Professor in the red
 But these days served Manish accused beat her up for money
 Had been tortured.  Night after 08 pm everyday walkinto
 Became the norm.  The accused demanded Rs three lakhs to talk
 The tax began flogging the complainant came Tgan 25 Dates.
 04:09 He and his parents went to the police station reported.  But
 Manish started to threaten him and accused him of mobile messages sent Gdn area.
 Meanwhile Manish presented against him in a court case
 The complainant in the back to your marital Savita Date 22:08:09
 Began to live.  Nevertheless, the demand for money by the accused Manish
 The complainant stated that her father and brother will come and the same this
 Btlaange something about.  Her father and brother of the complainant dated 08/25/09
 Manish then asked to come home, but no money to bring the money Bawt
 Manish started beating him and his father and brother normally curse
 Fired home humiliated.

 4. The complainant Savita Police dated 08/25/09
 Kotwali police station in an accounting application based on which the accused
 No. 71/09 Bads offense against Section 498A.  Read with Section 3/4
 First Information Report has been posted on the Dowry Prohibition Act and episode
 Was taken into deliberation.  During the investigation of the scene made Nkshamuka
 went.  Savita complainant and witness Ashok Puri, Geeta Puri, girwar Singh
 , Statements as defined in the article were Munnalal.  Lepta?p and mobile
 Jbtiptrk Jbtkr made.  Sheets arrest accused arrested
 Created.  After the charge sheet was presented in court deliberation.

 5. Rejecting the innocence of the accused to the crime prevention
 took.  -313 Trial accused under Section Dnkprksnk  Expressed in the
 Complainant's parents instigate and ego problems.  Complainant's house
 He did not want to be accused in Jamnagar or shifted to Indore
 Complainant and her parents wanted her son home
 Wanted to be.  08.19.2009 till 08.24.2009 Date of treatment
 Was for did not exist in Amravati.  Falsely accused him
 Fsaya be expressed.  On behalf of the defendants accused Manish altar
 (Bksa 1) and witness Mahendra (Bksa 2) as a defense witness statements
 Are.

 6. Consider the following points to solve the case Han?-
 (1) whether the accused continuously Dinanak 12/12/2008 Date 25.08.
 09 central location .. Old LIG  Mission located Kmpaund
 Kotwali police station under the accused's house, the complainant
 Savita's husband over dowry demands to the complainant while
 Kurrta of physically and mentally harassing?
 (2) the date time and place Savita complainant or
 Three lakh dowry from the parents directly or indirectly
 demanded ?
 '' '' 'Speaking conclusion' '' ''

 7. In respect of the above points were considered mutually intermingled evidence
 Due to the dismantling them together to avoid duplication of evidence
 is being done.

 8. witness Savita (Aksa 1) says that the accused
 Where the accused was brought to her in-laws after marriage no
 The person was not found.  He said the accused in red college
 Worked as assistant professor.  For a while, everything
 But then came on for a day for three lakh to the accused
 Began to demand and demand began to beat her up.  witness
 According to his frustrations with the beating he dated 04.25.2009
 Kotwali police station but it had left her parents' house by reporting
 Since the accused was threatened on her mobile and sending dirty messages
 Thereafter the accused under Section -9 Hindu Marriage Act
 Had submitted an application to the Court dated 08.22.2009, he
 Had come and was living with the accused.

 9. The complainant also says that the accused followed her three
 Lakh was demanded and he was assaulted
 The accused told his father and brother in this regard, they will come
 will talk.  When her father and brother came Dinanak 25/08/2009
 He was accused walkinto and was banished from her home.
 Then his father and brother in the police station Kotwali accounting
 Exhibit P-1 was applied by the accused, her dowry
 Pratadik was physically and mentally.  Witnesses have also reported
 Exhibit P-1, based on the application of the accused against the Kotwali police station
 Exhibit P-2 in the first information report was posted and police Anish
 Was arrested.  The next day, police went to the spot report
 The house was built and Manish Nkshamuka Exhibits p.3 Lepta?p and mobile
 Exhibits made Jbtiptrk Jbtkr p.4.  Witness Geeta Puri (Aksa 2) the
 The complainant stated that the aforesaid statements supported and unchanged
 Her daughter Savita complainant had informed him by phone that the accused
 Savita is seeking the money.

 10. Witness Munnalal (Aksa 3) with respect to any incident
 Information is denied.  Declared hostile by the prosecution
 Asked pointer question witnesses support the prosecution case
 Is done.  Thus, based on the witness statements of any prosecution
 Force is received.

 11. Witness Saroj Puri (Aksa 4) says that he dated 25/08/09 the
 Depending on the application in Kotwali Thana complainant Svitake
 No. 71/09 on crime against the accused Manish Badvi Section 498A.  and
 3/4 Dowry Act registrations by case FIR Exhibits P 2
 During the investigation of this case was the article and plaintive witness Savita
 Ashok Puri, Geeta, girwar as defined in their articles and statements by Munnalal
 Had.  Witness the scene of the date 08/26/09 3 Mukanksha Prpi
 Making the complainant dated 08/28/09 from Savita and Alim to witness girwar
 In front of a laptop and a mobile Jbtkr black Rgan Jbtiptrk Prpi 4
 Creating and Dinanak 08/26/09 accused Manish Sakshign before the fall
 .6 Girkptrk make Prpi said.

 12. The defense witness Manish altar (Bksa 1) says that
 Dat Ka?m spouses on Matrimonial Profile of Savita came plaintive
 Was.  After being satisfied with all of the profile information Savita's father
 Ashok Puri had called him, he was there to meet Sohna
 After satisfaction of both parties dated 11 December 2008, his marriage
 Savita was fixed.  Witnesses also say that the Savita
 The parents came to see him and he lived alone in
 Pdata red was in college.  Savita's parents went to college
 Learned about him.  11:12:08 Date and sun of his
 Marriage Jamnagar as the ideal marriage was concluded that the
 Family members attended the meeting.

 13. Manish witness altar (Bksa 1) also said that his engagement to 13.
 11.08 before the sun of his own in Rampur Admishn M.Phil.
 Global University was made.  After the wedding they Nashik
 Trriymbkeshhwar were also roam.  During this time all was normal between them.  Savita
 There were calls from parents Do not stay alone in the family
 Sohna keep coming.  12th April 2009 Savita's mother Geeta Puri
 she came.  Dated 23 April 2009 of the Savita's M.Phil
 Thesis submitted to holding came home from Jabalpur Savita Geeta Puri
 All of the offerings of precious jewelery was taken away baggages.  Its
 Savita was with him two days later, but suddenly his behavior
 All was changed.  Savita Savita's mother, said she
 Is disobeyed.  The dung from small town to daub
 His mind does not.  Witnesses also said that two days after the date
 Sabita Jamnagar on 25 April 2009, has been alone.  He Savita
 Made several efforts to recall.  He Savita Date 03:05:09
 Jamnagar where Savita's father was taking with him walkinto
 And was beaten and banished her back after a two
 Once he was taking Savita.  She dated 20 July 2009
 Exhibits D-4 SP with regard to the application because Savita
 Was not coming back and was threatening to trap him in false cases.

 14. Manish witness altar (Bksa 1) also said that the date 15:08:09
 Had pain in her stomach when she was asked to show the doctor out
 Amravati was gone.  Dr. Date 08/24/09 19:08:09 from. Ramji Mishra
 Rajrsli the hospital was discharged on the 24th after he
 It was the 25th.  In the evening the same date he
 ASI.  Saroj Puri police station received a call from the police station that her reconciliation
 Saroj Puri when he is called to the police station came to arrest him
 Was taken and his mobile was seized.  Witness says
 He was in jail for three days and then came back to her cop
 Goods were brought home by breaking the lock of the house.  In respect of which he
 Ti.  Honor also had complaints.  He and other police
 Authorities also complained in this regard which Saroj Puri
 Action against you.  The witness says that he Savita
 There's no beating or torture, nor had demanded dowry, but
 He himself had spent money at marriage.

 15. Manish witness altar (Bksa 1) in support of the complainant Kthano
 Kotwali police station in the date 25/04/09 by Savita Ripeart Exhibits D 5,
 Prior to the first FIR in the present case the sub 0 06.24.09
 0 Saroj Puri been consulted by the foolishness of the information sheet for processing, display
 D6, the written application to the Superintendent of Police, Nagpur Exhibits D 7,
 TI station in Jamnagar.  Exhibits D-8 to the written application dated
 21:07:09 certified copy of the application sent to the superintendent of police in Nagpur
 Exhibits D-9, in the form of treatment conducted in Nagpur Exhibits D 10, plaintive
 Savitri to take to go to Nagpur and Nagpur
 Exhibit D Exhibit D ticket to come to Jamnagar Lgayt .11 .15 Certified
 Copies were introduced.

 16. The witness says that the will of their own red Savita
 Pdati in college for which he was not pressure on Savita
 Savita was red from the college experience has been certified Certificate
 16 per Prdi, dated July 27 to keep up with her by Savita
 2009, Section 9 of the Court under the Hindu Marriage Max 0
 Case submitted a certified copy of the order magazines Prdi 17, applications
 18 03:02:10 Date Prdi certified copy of a court order in Case
 19 Prdi certified copy, certified copy of the decree is submitted Prdi .20.  Its
 In addition to the deteriorating health of the accused dated 15 August 2009
 Refer to the Form 21 Prdi, after coming back from Amravati to Chekp
 In connection with the treatment prescripttion dated 22 18:10:09 Prdi, coming from Aprawati
 And tickets to Prdi Prdi .23 and .24, 25 and 26, admitted in Amravati
 Preskripson during the Prcia Prdi .27 .31 Lgayt Prdi, physician DW
 A certificate given by Prdi 32, accused by the developments in relation to
 During the public hearing, the police re-application
 Prdi .35, dated 08:09:09, 15:09:09 and the application Prdi .36 and .37 Prdi
 The principal application of the red college Prdi 38, dated 22.09.
 09 were given to police action to end permanently in crime
 Application dated 39 22:09:09 Prdi, Savita, Sagar IG
 To date the criminal proceedings against parents 29/09/09
The application Prdi 40, submitted by Sally Case
Without proper investigation made by him in relation to his arrest
Deputy mere application. Saroj Puri action against the police
23:08:13 date that the order made by the Superintendent of Saroj Puri
Nidna in the service book of the Ddn Idnraj should be punished with the
A certified copy of the report documents the Prdi .41 and .42 order Prdi
The accused are presented in support of his assertions.

17. Section 498A of the Indian Penal Code for a woman her husband
Kurrta be provided by relatives or offense is punishable.
The current term is defined in the Explanation Cruelty
 is. According to which 'toughness means- (a) any deliberate
Conduct which is of such nature that inspire her to suicide
Life or limb or health of the woman (whether mental or
Body) is likely to cause serious damage or threat, or (b) any
In order to tease him that this woman or any relative
Any property or valuable security to a demand Prpeedit
This is done to her chagrin that his relatives
Has not been able to meet the demand. '' Hand in case a Bads section -498.  The
Clarification on the second section of the Accused under demanding dowry
And demanding the complainant's objection to cruelty.

18. witness Savita (Asa 01) said that his wedding
Spontaneously even before the Jamnagar and City Central School Higher
The work was teaching in secondary schools. Also, it is reported that
After separating from the accused, he works teaching.  Self
Witnesses reported that the accused in the main trial he said
Red college but she was working as assistant professor
Not to say that the task of witnessing to the accused
Any type pressurized. It is noteworthy that the witness MA
B.Ed. High teacher with a girl who had been accused of living
Before and after the act of spontaneously doing the teaching, in this case it
Can not be assumed that the demand for money, the complainant accused
To put any kind of job was created or cruelty.
The complainant himself Ma? Geeta Puri (Asa 02) acknowledged that self
Manish accused the complainant after his admission to the engagement of Mkfil
The study was conducted in the course for which it is shown that the accused
Manish and the complainant were both working in the field of education and higher education
Were trying to achieve.

19. witness Savita (Asa 01) and Geeta Puri (Asa 02) that his statements
That the accused is not expressed anywhere before marriage or during marriage
Demanded any dowry or any such demand
It was the time of marriage. It is acknowledged that both Witnesses
Accused and complainant regarding marriage site posted Metromoniyl
After being satisfied with their resume, began. Geeta Puri witness post
No. -7 report he submitted in respect of the complainant's marriage
This was made clear in the ad text for the wedding of the groom
Need does not expect a dowry. Savita complainant admitted
That after marriage she and Manish Trimbakeshwar, Nashik and Indore,
Devas were the complainant and the accused even after the marriage
Married life was normal. This is shown by the accused from the wedding
Immediately before the time of marriage and after marriage just any dowry
The demand was not.

20. The complainant stated that the accused Savita few days after the wedding
Three lakh had been demanded and the demand
He was assaulted by the complainant but it was not clear
How long after the marriage from the beginning was the dowry.
Dowry and cruelty by the complainant in relation to a specified time,
No date or location has not specified event sequence in his statements
Rather dowry and beaten only a formal statement
Is done. Geeta Puri said after witnessing the wedding day four Pa?c
After that the accused was with the accused Savita Savita about themselves
Came Jamnagar. He accused the witness says that after marriage
And had come to live with Savita. On the Witness
The explanation was that the operation of the foot of Savita service
He came to a stop and was four days. Post No. 18
Geeta Puri witness said that between the accused and Savita
There was a clash. Witnesses said that the accused in the post number 25
Savita him not to demand any dowry. Auto Express witness
That night was the clash between runs.

21. Thus the witness revealed that she married Geeta Puri Kthano fine
After the accused and the complainant and the date of their home and
04/25/09 maiden by the complainant at the police station to report tells him
Even before the complainant and the accused with Geeta Puri said.
If the accused demanded Rs one lakh from the complainant row
The complainant was demanding to him by assault Kurrta
And it was not possible that the same was done in the home while Geeta Puri
It does not matter, because knowledge itself is the witness said in his statement
In connection with dowry demands that Savita had reported to him on the phone.  with
It is also clear from the witness statements of the accused and the complainant Heata
Mutual talks between the general conflict or controversy.

Although the report by the complainant 22. Date 25/04/09
Certified by the court or the prosecution has not presented
Exhibits D self defense however said the report. 5 certified
Kotwali police station to report that the complainant had admitted Savita
That exhibits d. 5 indicated by the observation that in the said report
Complainant to the police station reported to the effect that he with whom
Parent household is wearing clothes and carrying the necessary documents
But the Ripeart dowry by the accused or the complainant
There is no mention of assaulting. Plaintive self-educated
The woman was employed as a professor, in this case the complainant
It then tells of his life and no reason to be tight, and the maiden
Kotwali police station by the complainant occurred in the incident with
No one is not mentioned.

23. Under Article 9 episode went on record a neutral party between Hindu
Marriage Act in court passed the order dated 03:02:10
Exhibit D-19 is present in which the Court itself clearly
The episode has been noted that the court date 22:08:09
But the Court was pending with the complainant or his father beat
And no information in respect of applications submitted no
 Did. Although the facts in the present case in relation to the considerable Binduo
Much more directly to positive or negative outcome
The court must consider, however, is not important to do so at
The complainant shall be with it, the incident occurred at the appropriate level
Or take the opportunity to inform the competent authority notwithstanding
Complainant did not do that. Jamnagar complainant even after the husband's house in Jamnagar or police officer at any police station in connection with an incident is not reported.

24. At this point the challenge given to the complainant on the cross-checking post
No. 12 in the complainant states that the accused threatened to kill
The report was so scared, he said things had not Likhayi.  ahead
Witness tells why the accused was thrown over him cob discount
His Ma? came from. Savita said that in the post No. 14 dated
On 04.25.09 he was teaching and Manish both college and from college
Where did you go straight to the police station Ripeart enroll with
Policemen came to his house and he was leaving the Jamnagar
Thus enroll immediately before the report was plaintive and his college
And then the police had received assistance can not be considered
To the extent that the complainant had been Byakrnat that occur with
Does not refer to the actual event.

25. Post No. 19, accused by the complainant Savita tells her
The case was put against him under Section 9 of the notice
He was present in court but the witness denied
After becoming aware of the notice of the episode, he accused
FIR against Was Likhayi. It noted that the display of P 1
The application date is given on the basis of which the police station on 08.25.09
Ripeart Exhibit P-2 has been registered first information stream by the accused
Exhibits D 9 under application. 18 dated 07/27/09 submitted to the Court
Was to obtain information to be released to the presence of self
Complainant admitted. Said that it reflected the episode
After receiving the information of the complainant's application by Exhibits P 1
Was at the police station or harassment related to dowry and its former
Ripeart did not have any.

26. The defense witness by Manish (01 inhabited) in the evidence of the date of 19:08:09
08.24.09 out of town on his 21 Exhibits D Lgayt
Exhibit D-32 presented various medical documents and tickets
But on the prescripttion by the physician or the person who prepared
There have also been certified. Manish mere names on the documents to the altar
Based on the veracity of the documents is not certified. Similarly
Accused by the SHO and SP and Nagpur
Depending on the application form against him were unsubstantiated insinuation
However, this conclusion must not be removed from the application forms
Criminal proceedings were instituted against him by the accused to
Was Prtyashanka. The application which resulted Exhibits D 4,7,8,9 etc.
The applications were submitted by the accused, but no
Do not receive benefits.

27. In criminal cases, the matter beyond doubt his prosecution
Has to be proved, in the presentation of evidence by defendants in such cases
Default or omission of any benefit to the prosecution can not be provided
 is. It argues that in the case of defendants observer Mrs. Saroj
Savita Puri complainant by the flawed interpretation of the relative
Said. In this regard, during the testimony on cross-checking suggestions
Witness is evident from the fact that the complainant denied that his relative.
Since the date 25/08/09 Mrs. Saroj Puri police station in-charge lady desk
So he was the police station registered a case and the interpretation
Durashy is not considered to be complete. Although it is true that the complainant
Savita after the arrest of his sister Ripeart Date 25/08/09
Exhibit P6 states to arrest the accused, according to the sheet
The date 08/26/09 was arrested.

28. The witness admitted that a neutral party in the middle of the consultation process
After failing Ripeart article was the first information and the
During the consultation process, and given to the police by the accused
Ptrane became aware of the application. The consultation proceedings
Any documents submitted by the prosecution, or certified translation
Conducted on the basis of which it can be inferred that the first information
Ripeart registered before the actual dispute between the parties in what
Exhibit D-6 was Pristhitia? however shown that the date of the notification letter
24/06/09 07:08:09 Date of issue of the notice for the purpose of consultation
Observer to remain was issued by Mrs Saroj Puri
Since the first notification of the consultation process of the current episode Ripeart Exhibits
P 2 is immediately before being registered and Exhibits D 4,7,8 and 9 of the application
Papers had to interpret the information, then surely the
In the view point in the proceedings were Liyne important part of the prosecution
Has not been certified.

29. The accused in the current case by observer Mrs. Saroj Puri
Exhibits D-42 in relation to the proceedings flawed document presented
Which has been the action taken against the accused on the application of observer
The right to information related to the order, the Exhibits D 42
The departmental proceedings against the order passed in order observer
Ja?c after which it is noted that the observer's Mrs. Saroj
In the current episode, No. 601/09 dated 25/08/09 by Puri on crime
First Information Ripeart Panjibddhkr accused was arrested and sent to prison
Accused his former marital relationship to the re Date 07/27/09
Srthapana observer imposed by the court for the application in this case
During the search, you fail to comply with the law provisions and without the Ja?c
The immediate arrest of the accused in respect of neglect found
Due to punish him is to condemn. Thus, although Exhibits
D. 42 of the order is not binding in any way on the court
However, it is clear that the procedural law by observer
Notwithstanding the provisions were taken against the accused.
30. The defendants have submitted several of which Nyaydristant
Consistent with the current episode 'Justice Pattanaik V Gnanath illustration. Orissa
State (2002) 1 Sksikar 0.845 '' in which it is presented as determined
Has been accused by the victims to be with regard to Kurrta
No reliable evidence exists, the Bads under Section 498A
No conviction may be.

31. Nyaydristant 'V Shailendrasinh. Mkprkrajy 2005 (two) Mkpi.alkjek
224 'by the Hon'ble High Court has determined that the husband
Each assault or harassment by or Natedaro Section 498A Badsn
Toughness does not come under the ambit of the concept of intent Justice
Illustration 'Sarala Prabhakar Sikar.alkjek 1990 against Maharashtra
407 '' has also been in. Similarly, the defense submitted on behalf of justice
Illustration 'and Rita Sharma v. Madhya Pradesh and Others (2014) 1 MP.
WN 0.86 '' It has been determined that section 498 A and dowry
Offences under the Act on Prohibition of time and place specified in the first
Information Ripeart not been written in, such report has Abhikndit
Is worthy.

32. The method of determining the relative current episode in the aforesaid Nyaydristant
Please refer to the conditions, it becomes apparent that the complainant Savita Trivedi
Her dowry by the accused to be tortured and respect
In any event Dinanak Virnirdisht, time, place, or event sequence is
According to the official statement, but only the dowry and Kurrta
 Are. On the first occasion and then some occasions to date 04.25.09
Hang on the complainant against the accused while not Ripeart, accused DW
Under the Hindu Marriage Act in court by section 9 of the presentation application
After the first information was made Ripeart article dated 8/25/09 station.
Geeta Puri Ma? complainant's dowry to him or any of cruelty
The statement did not. Marriage by the accused at the time of marriage before and right
After the demand of dowry is not the prosecution case
Unlike self Geeta Puri (Asa 02) It is acknowledged that the accused
Through pre-purchase checks for her wedding were paid Rs.
Manish clarification in respect of which it has been given money by check
Were refunded through, is not accepted.

33. complainant of any medical reports or any independent witness
Supporting evidence is not on record. Exhibits on the application of P 1
Date 8/25/09 assault complainant by the accused to be consistent
Any statements made in court by Savita plaintive statement
 is. The complainant told the brother tells his mouth only prosecution witness Girvrsinh
Has not been tested by the prosecution, the accused
Preparation and misused by the question of fake identity cards
This point is not considered in the present case in this respect nor
No charges have been framed on the accused, so that the deliberation on
Would be incomprehensible.

34. On the basis of the aforesaid in the prosecution failed to prove it
12/12/2008 consistently report that accused Dinanak date of 25/08/09
Old LIG central location .. Kmpaund accused the mission house
Under Kotwali police station, the complainant Savita's husband
While demanding dowry complainant physically and mentally
Savita Kurrta harassing the complainant and his or her parents
Three lakh dowry demands directly or indirectly. Eventually
Accused son Manish altar altar Mathura Prasad Bakdkvik  Of
Section 498'a 'and Section 4 of the Dowry Prohibition Act, 1961, on charges of
Is absolved of.

35. The accused's bail and sureties are weightless.

36. During the trial the accused or the accused's research Case
From 08/26/09 to 29/08/09 is the date in judicial detention. As such
Section -428 Dnkprksnk The certificate should be attached in a separate case.
The decision was announced in open court.
I was typing direction.

A walk alone (-)     29 September 2016

@498a fighter congrats brother..

Adv Aneesh Trivedi 9424449500 (Advocate)     30 September 2016

thanks to A walk alone

Arjun   15 November 2016

Congrats 498A fighter. You are real fighter.

 

Adv Aneesh Trivedi 9424449500 (Advocate)     16 November 2016

welcome arjun this is possible only by well wishes and experts guidance and help from this forum

 

Arjun   17 November 2016

In addition to experts guidence and help, it is your patience and strong will to fight on fake cases.

Which is highly appreciatable.

Also, help othet fighters who are in need of suggestions.


Leave a reply

Your are not logged in . Please login to post replies

Click here to Login / Register  


Start a New Discussion Unreplied Threads



Popular Discussion


view more »




Post a Suggestion for LCI Team
Post a Legal Query