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Combo Legal Consultancy 23 August 2026
पुनरीक्षण संख्या : ________ / सन् 20____
ग्राम : __________
परगना : __________
तहसील : __________
जनपद : __________
निवासी ग्राम __________, परगना __________, तहसील __________, जनपद __________
पुनरीक्षणकर्ता
बनाम
__________ पुत्र __________ निवासी __________
__________ पुत्र __________ निवासी __________
राज्य सरकार, द्वारा जिलाधिकारी, जनपद __________
विपक्षीगण
मान्यवर,
पुनरीक्षणकर्ता निम्नलिखित निवेदन करता है—
1. यह कि, प्रस्तुत पुनरीक्षण अधीनस्थ न्यायालय __________ द्वारा वाद संख्या __________, अन्तर्गत धारा , ** बनाम __________**, में पारित आदेश दिनांक __________ के विरुद्ध प्रस्तुत किया जा रहा है।
2. यह कि, विवादित भूमि ग्राम __________, परगना __________, तहसील __________, जनपद __________ स्थित गाटा/आराजी संख्या __________, रकबा __________ से संबंधित है।
3. यह कि, उपरोक्त भूमि के संबंध में कार्यवाही का संक्षिप्त तथ्य यह है कि __________।
4. यह कि, पुनरीक्षणकर्ता द्वारा अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से यह आपत्ति/कथन प्रस्तुत किया गया था कि __________, किन्तु विद्वान अधीनस्थ न्यायालय द्वारा उक्त महत्वपूर्ण तथ्य एवं अभिलेख पर समुचित विचार नहीं किया गया।
5. यह कि, अधीनस्थ न्यायालय ने दिनांक __________ को आदेश पारित करते हुए __________ कर दिया, जिससे पुनरीक्षणकर्ता के अधिकार एवं हित प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए हैं।
6. यह कि, प्रश्नगत आदेश विधि एवं उपलब्ध अभिलेख के विपरीत होने के कारण निरस्त किये जाने योग्य है।
7. क्योंकि, प्रश्नगत आदेश विधि, तथ्य एवं अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों के विपरीत है।
8. क्योंकि, अधीनस्थ न्यायालय द्वारा अपने में निहित क्षेत्राधिकार का प्रयोग विधि के अनुरूप नहीं किया गया है तथा मामले के निर्णय हेतु आवश्यक तथ्यों एवं विधिक प्रश्नों पर विचार नहीं किया गया।
9. क्योंकि, प्रश्नगत आदेश पारित करते समय अधीनस्थ न्यायालय द्वारा अधिकारिता से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न __________ पर विचार नहीं किया गया, जिससे आदेश विधिक त्रुटि से ग्रस्त हो गया है।
10. क्योंकि, अधीनस्थ न्यायालय द्वारा अभिलेख पर उपलब्ध महत्वपूर्ण दस्तावेजों, यथा __________, __________ एवं __________ पर विचार किये बिना आदेश पारित किया गया है।
11. क्योंकि, पुनरीक्षणकर्ता द्वारा प्रस्तुत आपत्तियों एवं साक्ष्यों का न तो समुचित परीक्षण किया गया और न ही उन्हें अस्वीकार करने का कोई पर्याप्त एवं विधिसम्मत कारण आदेश में अंकित किया गया है।
12. क्योंकि, प्रश्नगत आदेश में निकाला गया निष्कर्ष अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री से समर्थित नहीं है तथा महत्वपूर्ण साक्ष्य की उपेक्षा करके निष्कर्ष निकाला गया है।
13. क्योंकि, अधीनस्थ न्यायालय द्वारा अप्रासंगिक तथ्यों/सामग्री को महत्व दिया गया है, जबकि विवाद के निर्णय हेतु आवश्यक एवं प्रासंगिक सामग्री की उपेक्षा की गयी है।
14. क्योंकि, प्रश्नगत आदेश कारणरहित/अपर्याप्त कारणयुक्त है तथा उसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पुनरीक्षणकर्ता की प्रमुख आपत्तियां किन कारणों से स्वीकार किये जाने योग्य नहीं पायी गयीं।
15. क्योंकि, पुनरीक्षणकर्ता को अपना पक्ष एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने का पर्याप्त एवं प्रभावी अवसर प्रदान नहीं किया गया, फलस्वरूप प्रश्नगत आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के प्रतिकूल है।
16. क्योंकि, यदि प्रश्नगत आदेश पुनरीक्षणकर्ता को समुचित नोटिस अथवा सुनवाई का अवसर प्रदान किये बिना पारित हुआ है, तो ऐसा आदेश सुनवाई के मूल सिद्धान्त के प्रतिकूल होने के कारण विधि की दृष्टि में कायम रहने योग्य नहीं है।
17. क्योंकि, अधीनस्थ न्यायालय ने पक्षकारों के अधिकारों एवं अभिलेखीय स्थिति का समुचित परीक्षण किये बिना __________ को आधार मानकर आदेश पारित कर दिया, जो विधिसम्मत नहीं है।
18. क्योंकि, प्रश्नगत आदेश में अभिलेख पर उपलब्ध __________ की प्रविष्टि/आदेश/दस्तावेज की विधिक प्रभावशीलता पर विचार नहीं किया गया है।
19. क्योंकि, अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित आदेश के निष्कर्ष और उसके समर्थन में अंकित कारणों में परस्पर असंगति है।
20. क्योंकि, प्रश्नगत आदेश से पुनरीक्षणकर्ता के भूमि संबंधी अधिकारों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और आदेश को प्रभावी रहने देने पर पुनरीक्षणकर्ता को अपूरणीय क्षति होगी।
21. क्योंकि, अधीनस्थ न्यायालय द्वारा मामले के वास्तविक विवाद __________ का निर्धारण किये बिना ही अंतिम निष्कर्ष अंकित कर दिया गया है।
22. क्योंकि, प्रश्नगत आदेश में ऐसी महत्वपूर्ण तथ्यगत एवं विधिक त्रुटियां विद्यमान हैं जिनके कारण अधीनस्थ न्यायालय द्वारा अपनायी गयी प्रक्रिया एवं निकाला गया निष्कर्ष विधि की कसौटी पर टिकाऊ नहीं है।
23. क्योंकि, प्रश्नगत आदेश न्यायसंगत, तर्कसंगत एवं अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री के सम्यक परीक्षण पर आधारित न होकर सरसरी तौर पर पारित किया गया है।
24. क्योंकि, न्यायहित में प्रश्नगत आदेश का पुनरीक्षण किया जाना आवश्यक है।
25. यह कि, पुनरीक्षणकर्ता सुनवाई के समय आवश्यकतानुसार अन्य विधिक आधार प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता है।
26. यह कि, प्रश्नगत आदेश के आधार पर __________ की कार्यवाही किये जाने की संभावना है। यदि पुनरीक्षण के निस्तारण तक प्रश्नगत आदेश दिनांक __________ के क्रियान्वयन/प्रभाव पर रोक नहीं लगायी गयी तो पुनरीक्षणकर्ता को गंभीर एवं अपूरणीय क्षति होगी तथा प्रस्तुत पुनरीक्षण का उद्देश्य निष्फल हो सकता है।
27. यह कि, पुनरीक्षणकर्ता के पक्ष में प्रथम दृष्टया विचारणीय मामला है तथा सुविधा का संतुलन भी पुनरीक्षणकर्ता के पक्ष में है। अतः न्यायहित में पुनरीक्षण के अंतिम निस्तारण तक प्रश्नगत आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन को स्थगित किया जाना आवश्यक है।
अतः श्रीमान जी से सादर प्रार्थना है कि कृपया—
(क) अधीनस्थ न्यायालय __________ के वाद संख्या , ** बनाम __________**, में पारित आदेश दिनांक __________ से संबंधित मूल पत्रावली तलब की जाये;
(ख) प्रश्नगत आदेश दिनांक __________ को निरस्त/अपास्त करते हुए पुनरीक्षणकर्ता के पक्ष में न्यायोचित आदेश पारित किया जाये;
(ग) वैकल्पिक रूप से, यदि माननीय न्यायालय उचित समझे तो प्रश्नगत आदेश को अपास्त कर प्रकरण को विधि के अनुसार पुनः निर्णय हेतु आवश्यक निर्देशों सहित अधीनस्थ न्यायालय को प्रेषित किया जाये;
(घ) पुनरीक्षण के निस्तारण तक प्रश्नगत आदेश दिनांक __________ के क्रियान्वयन एवं प्रभाव पर रोक लगायी जाये; तथा
(ङ) न्यायहित में ऐसा अन्य आदेश भी पारित किया जाये जिसे माननीय न्यायालय मामले की परिस्थितियों में उचित एवं आवश्यक समझे।
दिनांक : __________
स्थान : __________
पुनरीक्षणकर्ता
द्वारा अधिवक्ता
मैं, __________, उपरोक्त पुनरीक्षणकर्ता, सत्यापित करता/करती हूँ कि इस पुनरीक्षण प्रार्थना-पत्र के दफा 1 से __________ तक वर्णित तथ्य मेरे व्यक्तिगत ज्ञान एवं अभिलेख के आधार पर सत्य हैं तथा विधिक आधार प्राप्त विधिक परामर्श के आधार पर प्रस्तुत किये गये हैं। कोई महत्वपूर्ण तथ्य जानबूझकर छिपाया नहीं गया है।
दिनांक : __________
स्थान : __________
पुनरीक्षणकर्ता