Just as fire is the same and only one,
though it enters the fuels of various sorts,
so also the Lord of the universe, who has
created the World and entered into all
beings, appears different because of the
different bodies in which He resides.
(Swami Sivananda)
जिस प्रकार अग्नि केवल एक और एक है पर यह
ईन्धन के विभिन्न स्रोतो में अलग-अलग दिखाई
पडती है उसी प्रकार सर्व शक्तिमान ईश्वर, जिसने
यह जगत रचा है, भी एक ही है पर भिन्न
रूपों मे रहने के कारण अलग दिखाई देता है।