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Queries Participated

Bhikham Saini   18 December 2013 at 22:54

Section 143 of ipc

Please advise whether section 143 of IPC is compoundable or Non-Compoundable?
Is there any Ruling of High Court/Supreme Court recetlt in which it has been accepted as compoundable, if so please refer it to me.....

continue
Bhikham Saini   01 December 2013 at 21:45

Cash stolen-police imlicating compainant,instead of probing the case

श्रीमान = मेरे एक रिश्तेदार कि ओफ़िस से नगद रुपियो कि
चोरी हुई। उनकी दूकान कि चाबी स्वयं उनके पास , एवं दो अन्य
पुराने कर्मचारियों के पास होती है, दिन भर कि बिक्री रात में दूकान में
ही लकड़ी की टेबल के ड्रावर में होती है एवं दूसरे दिन बैंक में जमा होती है
लेकिंग ड्रावर की चाबी सिर्क मालिक के पास ही होती है,अत: कर्मचारी
दूकान ही खोल सकते है और ड्रावर नहीं। रोज की तरह कर्मचारियों
ने दूकान खोली थी एवं मालिक बाज़ार का काम निपटा कर करीब एक बजे आया और
बैंक में जमा करने वास्ते रुपये ड्रावर से निकलने गया तो देखा रुपये नहीं है
और दूकान का रोज़ काम में आने वाला एक थैला भी गायब है। कोई ताला नहीं टुटा,
कोई भी कुछ जानने से इंकार कर रहा है और हम किसी पर भी इल्जाम/शक करने के
लायक नहीं है।

पुलिस ने हमारी FIR धारा IPC 380 तहत के तहत दर्ज़ कर
केस डायरी को क्राइम-ब्रांच में दीया है। उन्होने मालिक,उसके निजी पुत्र ,
व् दो कर्मचारियों के दो-तीन बार बयानलिए है,व् दो-तीन बार पूछताछ की
है,सभी के मोबाइल नंबर लेकर शायद काल - डिटेल्स निकलवा रहे है।

अब आश्चर्य की बात है की अधिकारी मालिक व् उसके पुत्र से यह कहलवाने पर/
मानने पर जोर दे रहे है कि कोई चोरी नहीं हुई व् हमने झूठी शिकायत दर्ज करवाही
है और मालिक व् उसके पुत्र पर धारा 121 IPC लगाने की धमकी दे रहे है।

हम न तो किसी कर्मचारी पर ऊँगली उठाने लायक हैं, और न ही हमारे
लड़के के बारे में ऐसा सोच सकते है कारण मेरा लड़का मेरे साथ आता है और मेरे साथ जाता है
और रविवार को भी ज्यादा समय घर पर खाते पुरे करने में व्यतीत होता है,
और लड़के पर कोई शक करने का कोई कारण नहीं है।

बड़ी अजीब समस्या से गुजर रहे है। नगद गया, आम नागरिक कि तरह शिकायत दर्ज़
करवाई,और अब विभाग हम बाप-बेटे को ही मुल्ज़िम साबित करने पर तुला हुआ है ,

कृपया हमे सलाह दीजिये कि :

०१. विभाग हमारे साथ ऐसा किस वजह से कर रहा है, और उनके किसी भी इस तरह के
कदम से वोह हमारा क्या-क्या कर सकते है व् हमे क्या करना चाहिए?
हमे पूरी आशंका बन रही है कि किसी अनजान कारणवस विभाग उल्टा हमे ही
उत्तरदायी बनान चाह रहा है और किसी बड़ी परेशानी कि आशंका हो रही है ,
सचाई तो सिर्फ यह है कि आम दिन कि तरह से बिक्री का भुगतान आता है और दूसरे दिन
काम के लायक भुगतान रख कर बैंक में जमा हो जाता है ,
रोज दो में से एक कर्मचारी दस बजे दूकान खोलता है
और हम साढ़े-बारा बजे आते है। सभी पुराने आदमी हैं।
रात को नो बजे रोज की तरह सभी मिल कर दूकान बंद करते है ,
दूसरे दिन बिना कोई टला टूटे,नगद गायब मिलता है, किन्तु यह भी सच है
कि रोज कि तरह नगद लकड़ी के ड्रावर में ही था जिसमे कि ताला था लेकिन
वह बंद हालत में पाया गया,

घटना - शिकायत के दो घंटे के बाद ही अधिकारी हमसे ऐसा व्यवहार कर रहे कि हमने ही चोरी कि है या
हमने झूठी शिकायत दर्ज़ कारवाही है और अब हम पर नया केस बनाने कि धमकी दी जा रही है।

हमे क्या करना चाहिए?

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Bhikham Saini   08 October 2013 at 13:03

Notice pay demand

I joined a company and my appointment letter says that three months notice period is required if i leave the company,i.e.either i have to notice three months in advance or i should pay amount equal to three months of my salary.But the company may sack me without notice and without any payoff. I have been sick-bed ridden and have duly informed the company in writing with my medical documents.
the company has terminated my services and now has sent a demand for three months notice pay.I have not resigned.I also do not desire anything from company.But how i am liable to pay the three months salary to company.the company is not giving my release letter and also may endanger my new job when they are approached for previous employer verification.please tell me (01) if i am liable for payment of notice pay to the company.(02) what shud I do for securing my release letter(03)what company shall do to me if i do not pay.I am at Mumbai and company registered office is at Delhi....Urgent

continue
Bhikham Saini   08 October 2013 at 10:16

मेरे ताउजी और पिताजी ने मिल कर एक जमीन संयुक्त नाम से खरीदी थी।

मेरे ताउजी और पिताजी ने मिल कर एक जमीन संयुक्त नाम से खरीदी थी।
याने की ताउजी +पिताजी के नाम से। ताउजी अविवाहित - निसंतान गुजर गए थे।
मेरे पिताजी भी बिना किसी वसीयत के गुजर चुके हैं। हम दो भाई हैं।
कुछ समय पहले मेरे बड़े भाई का भी देहांत हो गया।
अभी हाल में मेरे स्वर्गीय भाई के लडको ने उस जमीं के टुकड़े कर बेचना शुरू कर
दिया तो पूछने पर उन्होंने बताया की वह जमीं तो उनके पिताजी याने मेरे भाई की
अकेके की है और उसी ने खरीदी थी। जमीं के कागज भाई के पास ही रहे थे।
जब हमने नगर निगम में जानकारी ली तो वह से मूल खरीद पात्र की कॉपी मिली
जिसमे मेरे बड़े भाई ने हमारे पिता का नाम काट कर खुद का नाम लिख लिया था
व् निगम में ताउजी +खुद के नाम से दर्ज करवा ली थी। फिर ताउजी की मृत्यु बाद
एक सपथ पात्र देकर खुद को ताउजी का एकमात्र पुत्र दिखा कर उसकी नाम्दार्ज़ी सिर्फ
अपने अकेले के नाम करवा कर निगम से प्रमाण पात्र भी ले लिया। जमीं का कुछ
हिस्सा भाई ने अपने एक पुत्र को गिफ्ट कर दिया। अब उसके लड़के उस जमीं को
अपने पिता से मिली हुई बता कर बेच रहे है। जबकि किये हुए गलत कामो की
उन्हें जानकारी है फिर भी पूरी जमीन हडप कर बैठे है।

स्थानीय वकील साब का कहना है की इसमें मेरे दिवंगत भाई व् उसके
वारिस ,याने उसके लड़के , लड़की, पत्नी ,निगम अधिकारी ,व् नए क्रेता पर
धोखा-दडी का फोजदारी केस बनता है(क्योंकि वह सब उस जमीन को अपने
नाम करवाने की कार्यवाही कर रहे हैं व् बेच भी रहे हैं।) ,
लेकिन मैं इस बात से सहमत नहीं हो
पा रहा हूँ की एक मृतक व्यक्ति पर कैसे मुकदमा दायर किया जा सकता है?

कृपया (हिंदी/इंग्लिश) में बताएं की मेरे पास इस स्तिथि से निपटने के
क्या उपाय है व् मुकदमा किस किस पर बनेगा ?

continue
Bhikham Saini   08 October 2013 at 10:10

Criminal complaint against dead person

मेरे ताउजी और पिताजी ने मिल कर एक जमीन संयुक्त नाम से खरीदी थी।
याने की ताउजी +पिताजी के नाम से। ताउजी अविवाहित - निसंतान गुजर गए थे।
मेरे पिताजी भी बिना किसी वसीयत के गुजर चुके हैं। हम दो भाई हैं।
कुछ समय पहले मेरे बड़े भाई का भी देहांत हो गया।
अभी हाल में मेरे स्वर्गीय भाई के लडको ने उस जमीं के टुकड़े कर बेचना शुरू कर
दिया तो पूछने पर उन्होंने बताया की वह जमीं तो उनके पिताजी याने मेरे भाई की
अकेके की है और उसी ने खरीदी थी। जमीं के कागज भाई के पास ही रहे थे।
जब हमने नगर निगम में जानकारी ली तो वह से मूल खरीद पात्र की कॉपी मिली
जिसमे मेरे बड़े भाई ने हमारे पिता का नाम काट कर खुद का नाम लिख लिया था
व् निगम में ताउजी +खुद के नाम से दर्ज करवा ली थी। फिर ताउजी की मृत्यु बाद
एक सपथ पात्र देकर खुद को ताउजी का एकमात्र पुत्र दिखा कर उसकी नाम्दार्ज़ी सिर्फ
अपने अकेले के नाम करवा कर निगम से प्रमाण पात्र भी ले लिया। जमीं का कुछ
हिस्सा भाई ने अपने एक पुत्र को गिफ्ट कर दिया। अब उसके लड़के उस जमीं को
अपने पिता से मिली हुई बता कर बेच रहे है। जबकि किये हुए गलत कामो की
उन्हें जानकारी है फिर भी पूरी जमीन हडप कर बैठे है।

स्थानीय वकील साब का कहना है की इसमें मेरे दिवंगत भाई व् उसके
वारिस ,याने उसके लड़के , लड़की, पत्नी ,निगम अधिकारी ,व् नए क्रेता पर
धोखा-दडी का फोजदारी केस बनता है(क्योंकि वह सब उस जमीन को अपने
नाम करवाने की कार्यवाही कर रहे हैं व् बेच भी रहे हैं।) ,
लेकिन मैं इस बात से सहमत नहीं हो
पा रहा हूँ की एक मृतक व्यक्ति पर कैसे मुकदमा दायर किया जा सकता है?

कृपया (हिंदी/इंग्लिश) में बताएं की मेरे पास इस स्तिथि से निपटने के
क्या उपाय है व् मुकदमा किस किस पर बनेगा ?

continue
Bhikham Saini   21 September 2013 at 19:58

Case ruling asked by magistrate for substitution

My father filed a 420 case against my relative for making false paper of our land at local municipalty.My father expired in july-2013 and after death police closed the case submitted final report which came for hearing today at local court and my vakilji submitted my vakalatnama in the case for lodging protest but hakim told that after death of complainant in 420 case, the case stands Khariz and i can not fight the case.My vakilji argued then Haakim told to show any Ruling in this matter then he will allow me to continue the case.Urgently advice needed and Ruling needed.

continue
Bhikham Saini   21 September 2013 at 19:47

Plotting and selling of land even ti is in force

A partition suit and TI Application is pending before Distt Judge for our One 1580 yards residential land.A TI is issued against all the parties.Now one party has made two walls and created two plots of same size and have sold the same to some wrong persons and they have taken kabza of the same but we do not know the amount or type of paper they have made.we submitted the proper land sketch with TI application which showed the land as total vacant and now the size and shape has been changed and about 600 yards have been sold.we are seven parties.one party did it.all remaing six parties insist each other to take action.what to do? Any role of police also.

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Bhikham Saini   21 September 2013 at 19:36

Ruling asked by magistrate for adding son party to criminal case in place of expired father

My father filed a 420 case against my relative for making false paper of our land at local municipalty.My father expired in july-2013 and after death police closed the case submitted final report which came for hearing today at local court and my vakilji submitted my vakalatnama in the case for lodging protest but hakim told that after death of complainant in 420 case, the case stands Khariz and i can not fight the case.My vakilji argued then Haakim told to show any Ruling in this matter then he will allow me to continue the case.Urgently advice needed and Ruling needed.

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Bhikham Saini   27 May 2013 at 13:27

Approver under 306

I along with six other are facing charge of 420, 467,468,471,120B and have been arrested and are out on Bail under 439 by High Court.I along with two other are witness and thrre are fradulent seller of a property.The other accused are delaying charge sheet/trial by their resources and I am not able to withstand the same as I am 63yrs.I am advised to become approver under 306.
Please let me know the procedureof it , and(02) shall i get any benifit from it,.(03)Shall I only be convicted and others may be discharged?(04)where such trial shall be done?.(05) shall I be again arrested immediately on application made?.
Please clarify

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Bhikham Saini   05 May 2013 at 22:15

Status of criminal case after death of the complainant

My relative had sold my ancestral & undivided property at my native village showing himself as my Power of Attorney Holder(No POA was given to him),I have filed a criminal case and a civil application for partition.The relative along with his sons have been arrested by police in 420 case and they have been released on bail by high court after 40 days of custody.The police is yet to file formal charge sheet. In turn my relative(in his personal capacity) had filed a false cross case against me to block the investigation and action in my original case but after investigation by Addl.SP(District) a Neagative False Report has been submitted by police in false cross case which is pending before Magistrate for final acceptance and the complainant has not filed any protest to FR.Meanwhile my relative(who filed false cross case) has died.Now his one son has submitted a letter to Range IGP for re-investigation in his father false cross complaint and IG office has asked for case diary from the court( they have not re-called the FR)which Magistrate has not allowed so far and has fixed a date for final acceptance/disposal.

The opposite party desire to block my case, its charge sheet in which his father and three sons have been found as guilty in four higher level investigation and face trial u/s 420, 467,468,471,120-B.

My Query:
01. When the sole complainant in a criminal case has expired and police has already submitted a negative False Report in his complaint and none of his son has filed any protest before the Magistrate, then Can any of his son approach the IG office for reinvestigation and the IG office can do that?

02.Can a criminal case(on death of original complainant) can be substituted by his son after the death as in civil case?

Please advice...

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