Ram Samudre

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  Member Since : 18 January 2016  (Bombay)

सवर्णो के खिलाफ बोलो तो दलित/पिछड़े आरक्षित वर्ग खुश होते हैं

दलितों/पिछड़ों/आरक्षण के खिलाफ बोलो तो सवर्ण खुश होते हैं

मुसलमानों के खिलाफ बोलो तो हिन्दू खुश होते हैं

हिंदुओं के खिलाफ बोलो तो मुसलमान खुश होते हैं

अब यह राजनीति ख़त्म होना चाहिए और ख़त्म करेंगे युवा

हमें बात करनी है कि;

सबको पानी कैसे मिले?
सबको छत/घर कैसे मिले?
सबको चिकित्सा कैसे मिले?
सबको शिक्षा कैसे मिले?
सबको रोजगार कैसे मिले?
सबको सुरक्षा कैसे मिले?
सबको न्याय कैसे मिले?

और यह करने के लिए भ्रष्टाचार से चंद लोगों को अमीर बनाने वाला राजनीतिज्ञों/अधिकारीयों/कर्मचारियों/बिचौलियों/व्यापारियों का सिंडिकेट कैसे ख़त्म किया जाए ताकि देश के नागरिकों के पैसों का इस्तेमाल हर नागरिक को समान पानी, खाना, घर, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, और न्याय देने में लगाए जा सकें

हमें अब इस पर काम करना है ऐसे उपाय करना हैं कि;

धर्मभेद कैसे ख़त्म हो?
जातिभेद कैसे ख़त्म हो?
क्षेत्रभेद कैसे ख़त्म हो?
भाषाभेद कैसे ख़त्म हो?
वर्णभेद कैसे ख़त्म हो?
वर्गभेद कैसे ख़त्म हो?
लिंगभेद कैसे ख़त्म हो?


सभी धर्मों के लोगों को शासन/प्रशासन में कैसे समान भागीदारी मिले?

सभी जाति वालों को शासन/प्रशासन में कैसे समान भागीदारी मिले?

सभी क्षेत्र वालों को शासन/प्रशासन में कैसे समान भागीदारी मिले?

सभी भाषा वालों को शासन/प्रशासन में कैसे समान भागीदारी मिले?

सभी वर्ण वालों को शासन/प्रशासन में कैसे समान भागीदारी मिले?

सभी वर्ग वालों को शासन/प्रशासन में कैसे समान भागीदारी मिले?

महिलाओं को शासन/प्रशासन में कैसे समान भागीदारी मिले?

सभी धर्मों/जातियों/क्षेत्रों/भाषाओँ/वर्णों/वर्गों के पुरुष और महिलायें समान संख्या में कलेक्टर हों, पुलिस में हों, पुलिस इंस्पेक्टर हों, थानाध्यक्ष हों, पुलिस अधिकारी हों, कमिश्नर हों, सचिव स्तर पर हों, केंद्रित नौकरियों में समान भागीदारी हो, राज्यों की नौकरियों में समान भागीदारी हो, नगर पालिकाओं की नौकरियों में समान भागीदारी हो, शिक्षा में समान भागीदारी हो, अन्य रोजगारों में समान अवसर हों

आखिर यही करना तो सरकार का काम है
लेकिन सरकार और सत्ता में आने वाली पार्टियाँ ये कर रही हैं क्या?

नहीं कर रही हैं तो कौन करेगा?
हर नागरिक को स्वयं आगे आना होगा क्योंकि कोई किसी और के लिए कुछ नहीं करता सब सिर्फ अपने लिए ही करते हैं

तो समास से जुड़ें और 'मिलजुलकर रहने मिलजुलकर जीने की सद्भावना मूवमेंट' को मजबूती देकर अपनी जिम्मेदारी उठायें और अपना नेतृत्व स्वयं करें

यह लिंक देखें
www.facebook.com/smas7rights

जल्दी ही 'समास' की वेबसाइट भी उपलब्ध होगी जिसके माध्यम से आप अपनी आवाज़ उठा पाएंगे और संगठित होकर सत्ता और संसाधन में अपनी समान भागीदारी बना पाएंगे

smas7rights.org 26 मार्च 2016 को उपलब्ध हो जायेगी ऐसा हमारा प्रयास है

समास के व्हाट्सऐप ग्रुप्स से भी जुड़ सकते हैं - 09768703402



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