Regarding alimony


मेरे विद्वान मित्रों, मेरी पत्नी ने दिसंबर 2017 में डाइवोर्स केस फाइल की जिसमे वे विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी को नहीं मानती है और उसने यह भी कही है की शादी के समय वे उपस्थित नहीं थी फलाना फलाना ग्राउंड दी है. तत्पश्चात मैंने फेब्रुअरी 2018 में विशेष विवाह अधिनियम की धारा २२ के तहत पत्नी के विरुद्ध वाद दाखिल किया. दोनो ही वाद अभी एविडेंस स्टेज में चल रहा है. जून २०१९ को मेरी पत्नी ने मेरे वाद में विशेष विवाह अधिनियम की धारा 36 के तहत आवेदन दाखिल की है और वह मुझसे 25 हज़ार रूपए पार्टी माह और वाद खर्च 58 हज़ार रूपए की मांग की है. क्या यह न्यायोचित है? मैंने अपनी पत्नी के बैंक खाता में मेरे खाता से वर्ष दिसंबर 2016 से अगस्त 2017 तक रूपए हस्तांतरित किया हूँ, जिसका प्रमाण मैंने दाखिल किया हूँ. क्या फॅमिली कोर्ट मेरी पत्नी के favour में आदेश देगी? मैं ठगा गया हूँ. मैं एक गरीब लड़का हूँ. बहुत परेशान हूँ. कृपया विद्वानों मेरी मदद करें. इसके लिए मैं आपलोगों का आजीवन आभारी रहूँगा.
 
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अगर आप अपनी पत्नि से तलाक चाहते हैं तो उसे आपको प्रति माह गुजारा भत्ते के साथ साथ मुकदमे का खर्च भी देना पड़ेगा। हां प्रयास करने पर इसमें थोड़ी बहुत कमी हो सकती है। एक ही सूरत में आपको इससे राहत मिल सकती है, यदि आप यह साबित कर सकें कि उसका किसी अन्य मर्द से अनैतिक संबंध है, और वह उसी के साथ रहती है। एक हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार चाहे पति को चोरी करनी पड़े, भीख़ मांगनी पड़े, कर्ज लेना पड़े या स्वयं को बेचना पड़े, गुजारा भत्ते से राहत नहीं मिल सकती।
 
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